प्रदीप कुमार दुर्ग। Govardhan Puja Durg पूरे देश की तरह छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले में भी देवारी तिहार और गोवर्धन पूजा का पर्व बड़े ही धूमधाम, आस्था और परंपरागत उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ज़िले के प्रमुख समाजसेवी इंद्रजीत सिंह छोटू ने अपने सहयोगियों और समाज के सदस्यों के साथ इस पावन पर्व को श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया।
Table of Contents
उन्होंने परंपरागत विधि-विधान के अनुसार गौरा-गौरी और गोवर्धन पूजा की तथा नगरवासियों की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की। पूजा स्थल को दीपों, फूलों और रंगोली से सजाया गया था, जिससे पूरा माहौल भक्ति और उल्लास से भर उठा।
भक्ति, उत्साह और लोक परंपराओं का संगम
पूजा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक गीतों और नृत्य की धुनों से पूरा वातावरण गूंज उठा। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी पूजा में शामिल हुईं, वहीं युवाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए अपनी परंपराओं के प्रति उत्साह और सम्मान व्यक्त किया। Govardhan Puja Durg
इंद्रजीत सिंह छोटू ने पूजा के दौरान कहा कि देवारी तिहार और गोवर्धन पूजा भारतीय संस्कृति, प्रकृति के प्रति आभार और गौ-सेवा की भावना का प्रतीक है। यह पर्व हमें एकता, सहयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने में आगे आएं ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन मूल्यों से जुड़ी रहें।
साहस और आस्था की मिसाल “सांटा प्रहार” परंपरा
कार्यक्रम के दौरान इंद्रजीत सिंह ने “सांटा का प्रहार” झेलने की परंपरा का निर्वहन भी किया। यह प्रथा लोकआस्था का प्रतीक मानी जाती है, जिसमें व्यक्ति देवताओं की आराधना करते हुए स्वयं पर हल्का प्रहार झेलता है। इसे साहस, शक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए और “जय गोवर्धन, जय गौ माता” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। Govardhan Puja Durg
भक्ति और भाईचारे से भरा माहौल
पूजा स्थल पर चारों ओर भक्ति, उल्लास और भाईचारे की भावना देखने को मिली। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया और उपस्थित सभी लोगों ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। इंद्रजीत सिंह छोटू ने कहा कि ऐसे पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि ये समाज में प्रेम, एकता और सद्भाव को भी मजबूत करते हैं। Govardhan Puja Durg
उन्होंने नगरवासियों से अपील की कि इस पर्व की भावना को अपने जीवन में अपनाएं और मिलजुलकर समाज की प्रगति में योगदान दें। उन्होंने कहा, “देवारी और गोवर्धन पूजा हमें सिखाते हैं कि जब हम प्रकृति, पशु और समाज के प्रति संवेदनशील होंगे तभी सच्चे अर्थों में उत्सव सार्थक होगा।” Govardhan Puja Durg
परंपरा, आस्था और एकता का पर्व
दुर्ग ज़िले में इस बार देवारी तिहार और गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह परंपरा, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया। समाजसेवी इंद्रजीत सिंह छोटू की पहल और भागीदारी ने इस आयोजन को और खास बना दिया। स्थानीय लोगों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में नई ऊर्जा और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा देते हैं।
इस अवसर पर नगर के अनेक गणमान्य नागरिक, समाज के वरिष्ठ सदस्य, युवा और महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने इस पर्व को मिलजुलकर मनाया और यह संकल्प लिया कि आने वाले समय में भी वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को इसी तरह जीवित रखेंगे। Govardhan Puja Durg
इस प्रकार दुर्ग ज़िले में देवारी तिहार और गोवर्धन पूजा का पर्व आस्था, परंपरा और भाईचारे के अद्भुत संगम के रूप में मनाया गया, जिसमें समाजसेवी इंद्रजीत सिंह छोटू की भूमिका विशेष रूप से प्रेरणादायी रही। Govardhan Puja Durg
https://twitter.com/DainikHistory?t=un2EfdiIG8L5BD8EkPp2qg&s=08
Govardhan Puja Durg दुर्ग में देवारी तिहार और गोवर्धन पूजा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। समाजसेवी इंद्रजीत सिंह छोटू ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा की और सांटा प्रहार परंपरा निभाते हुए समाज में एकता और संस्कृति का संदेश दिया।