कोंडागांव :- FishFarming जिले में मछली पालन को एक सशक्त आजीविका के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासन ने एक सराहनीय कदम उठाया है। कलेक्टर सुश्री नुपूर राशि पन्ना के मार्गदर्शन में शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र कोपाबेड़ा में 10 दिवसीय मछुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण 8 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2025 तक चला, जिसमें जिले के करीब 120 कृषक व मत्स्य पालक शामिल हुए।
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इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मत्स्य पालकों को आधुनिक मछली पालन तकनीकों, वैज्ञानिक तरीकों और उन्नत प्रबंधन प्रणाली की जानकारी देना था, ताकि वे अपनी आय बढ़ाकर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। कार्यक्रम वित्तीय वर्ष 2025-26 के विभागीय योजनांतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने मछली पालन के हर पहलू पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
मछली पालन: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
कलेक्टर नुपूर राशि पन्ना ने बताया कि मछली पालन सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जिले में जलस्रोतों की प्रचुरता को देखते हुए, यहां मछली पालन से रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक किसान इस क्षेत्र में जुड़ें और वैज्ञानिक तरीकों से उत्पादन बढ़ाएं।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निरंतर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि मत्स्य पालक न केवल पारंपरिक तकनीकों पर निर्भर रहें, बल्कि आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का उपयोग कर अपनी उत्पादकता बढ़ा सकें।
प्रशिक्षण में मिली आधुनिक जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने मछली पालन की विभिन्न आधुनिक तकनीकों जैसे – हैचरी प्रबंधन, जल गुणवत्ता नियंत्रण, फीड प्रबंधन, रोग नियंत्रण, एवं मत्स्य विपणन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। FishFarming
प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि किस प्रकार सही तालाब निर्माण, जलस्तर की देखरेख और समय-समय पर सफाई से उत्पादन में गुणात्मक वृद्धि की जा सकती है। FishFarming
मत्स्य निरीक्षक कु. अस्मिता सिन्हा और कु. नोमेश्वरी दीवान ने बताया कि जिले में बड़ी संख्या में किसान अब मछली पालन को व्यावसायिक दृष्टि से अपनाने लगे हैं। प्रशिक्षण से उन्हें सही दिशा और तकनीकी जानकारी मिली है, जो आने वाले समय में बेहतर उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करेगी। FishFarming
कार्यक्रम में मौजूद रहे अधिकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर जनपद पंचायत कोंडागांव के उपाध्यक्ष टोमेन्द्र सिंह ठाकुर, श्रीमती फागेश्वरी कश्यप, एम.एल. राना (उप संचालक मछली पालन), योगेश देवांगन (सहायक मत्स्य अधिकारी), नवदीप ठाकुर और महेश बघेल सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। FishFarming
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और उन्हें मछली पालन को वैज्ञानिक, लाभदायक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। FishFarming
ग्रामीण आजीविका में नई दिशा
प्रशिक्षण में शामिल हुए कई किसानों ने बताया कि यह उनके लिए एक नया अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि पहले वे पारंपरिक तरीके से मछली पालन करते थे, लेकिन अब उन्हें समझ आया कि कैसे सही तकनीक अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन किया जा सकता है। FishFarming
प्रशासन की यह पहल न केवल मत्स्य पालन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रही है। प्रशिक्षण के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि जिले के अधिक से अधिक किसान इस दिशा में आगे बढ़ेंगे और कोंडागांव मछली उत्पादन के क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल करेगा। FishFarming
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