बस्तर (छत्तीसगढ़): Naxal Surrender छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से देशभर में एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है। नक्सल प्रभावित इलाकों में चल रही सरकार की लगातार कोशिशों और सुरक्षा बलों के समर्पित प्रयासों का बड़ा असर अब दिखने लगा है। शुक्रवार को बस्तर के जगदलपुर में नक्सल संगठन दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के प्रवक्ता और माड़ डिवीजन के बड़े नेता रूपेश समेत 140 से ज्यादा माओवादी मुख्यधारा में लौटने जा रहे हैं।
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इन सभी नक्सलियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया है। इस आयोजन को अब तक का देश का सबसे बड़ा नक्सली आत्मसमर्पण अभियान बताया जा रहा है। Naxal Surrender
बड़ी सफलता: दशकों से सक्रिय रहा रूपेश अब बनेगा शांति का प्रतीक
बताया जा रहा है कि आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे बड़ा नाम रूपेश का है, जो नक्सल संगठन का प्रवक्ता होने के साथ ही DKSZC (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) का प्रमुख सदस्य भी रहा है। रूपेश लंबे समय से बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा के जंगलों में संगठन के शीर्ष स्तर पर सक्रिय था। Naxal Surrender
सूत्रों के मुताबिक, रूपेश नक्सल आंदोलन की रणनीति तैयार करने, प्रचार अभियान चलाने और जवानों पर हमलों की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाता था। लेकिन अब उसने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
यह कदम न केवल सरकार की “विकास और विश्वास” नीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है, बल्कि यह बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में ऐतिहासिक मोड़ भी साबित हो सकता है। Naxal Surrender
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में आत्मसमर्पण समारोह
शुक्रवार को आयोजित होने वाले इस आत्मसमर्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम का आयोजन जगदलपुर में किया जा रहा है, जहां सभी 140 से अधिक नक्सली अपने हथियार सौंपकर सरकार की पुनर्वास नीति के तहत समाज में शामिल होंगे। Naxal Surrender
मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर कहा है कि –
“यह सिर्फ आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है। बस्तर का हर वह बेटा जो बंदूक छोड़कर विकास की राह चुनता है, वही असली नायक है। सरकार हर उस व्यक्ति के साथ खड़ी है जो हिंसा छोड़कर शांति का संदेश फैलाना चाहता है।”
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पुरुष और महिलाएं भी शामिल होंगे
जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष भी शामिल हैं, जो पिछले कई सालों से नक्सली संगठनों के साथ जंगलों में रह रहे थे। प्रशासन ने इनके पुनर्वास के लिए विशेष योजना तैयार की है, ताकि ये लोग शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन से जुड़ सकें। Naxal Surrender
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‘लो अब्बा लाने दे विकास’ – बस्तर का नया संदेश
बस्तर में पिछले कुछ वर्षों से सरकार द्वारा चलाए जा रहे “लो अब्बा लाने दे विकास” अभियान और आत्मसमर्पण नीति ने कई माओवादियों को प्रभावित किया है। हाल के महीनों में सैकड़ों नक्सलियों ने अपने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण किया है, लेकिन रूपेश और उसके साथियों का आत्मसमर्पण अब तक का सबसे बड़ा है। Naxal Surrender
सुरक्षा बलों और प्रशासन के बीच समन्वय, गांव-गांव तक पहुंच रही सरकारी योजनाएं, सड़कों का निर्माण और युवाओं को रोजगार देने की पहलें इस बदलाव की मुख्य वजह मानी जा रही हैं। Naxal Surrender
सरकार देगी पुनर्वास और आर्थिक सहायता
राज्य सरकार की ओर से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत आवास, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। साथ ही, जो हथियार छोड़ते हैं उन्हें आर्थिक प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, “जो लोग संगठन से अलग होकर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का पूरा मौका दिया जाएगा।” Naxal Surrender
बस्तर में नई उम्मीद की किरण
यह आत्मसमर्पण अभियान सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर के बदलते भविष्य की तस्वीर है। जिस इलाक़े में कभी बंदूक और डर का साया था, वहां अब शांति, विकास और शिक्षा की नई राह खुल रही है। Naxal Surrender
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब गांवों में माहौल बदल रहा है। सड़कें बन रही हैं, बिजली-पानी की सुविधा पहुंच रही है और बच्चे स्कूल जा रहे हैं। यह सब सरकार और सुरक्षा बलों के लगातार प्रयासों का नतीजा है। Naxal Surrender
Naxal Surrender 140 से ज्यादा नक्सलियों का एक साथ आत्मसमर्पण करना सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश है — कि हिंसा से कोई समाधान नहीं निकलता। विकास, शिक्षा और संवाद ही असली ताकत है। बस्तर आज एक नई कहानी लिख रहा है — शांति, विश्वास और उज्जवल भविष्य की कहानी।