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Fake Kidnapping Case, सरगुजा पुलिस ने सुलझाई फर्जी लूट और अपहरण की कहानी, नाबालिग ने खुद रची थी साजिश 2025

Fake Kidnapping Case, सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र में लूट और अपहरण की बताई गई घटना निकली झूठी। पुलिस जांच में नाबालिग ने खुद बनाया था फर्जी किस्सा, कारण था घर जाने में देरी।

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Fake Kidnapping Case

सरगुजा। Fake Kidnapping Case, सीतापुर थाना क्षेत्र में हुई लूट और अपहरण की सनसनीखेज घटना का पुलिस ने महज कुछ दिनों में पर्दाफाश कर दिया है। यह मामला जितना गंभीर लग रहा था, असलियत उतनी ही चौंकाने वाली निकली। दरअसल, जिस नाबालिग बालक ने अपने साथ लूट और अपहरण की बात कही थी, उसने ही पूरी कहानी खुद गढ़ी थी। वजह थी — घर लौटने में हुई देरी और परिवार वालों के डर से बनाया गया झूठा किस्सा।

घटना की शुरुआत ऐसे हुई

मामला 6 अक्टूबर 2025 का है। सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र में रहने वाला एक नाबालिग सुबह करीब 7 बजे अपनी मोटरसाइकिल से ट्यूशन के लिए घर से निकला था। लेकिन जब वह घर नहीं लौटा तो दोपहर करीब 11 बजे उसने चिखलीपानी के पास एक ट्रैक्टर चालक से मोबाइल फोन लेकर अपने पिता को कॉल किया। फोन पर उसने कहा कि उसके साथ लूट और अपहरण जैसी घटना हो गई है — छह लोगों ने उसकी बाइक छीन ली और उसे जबरन एक बंद पिकअप वाहन में डालकर ले गए।

यह सुनकर परिवार में हड़कंप मच गया। तत्काल थाने पहुंचकर परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज किया — अपराध क्रमांक 396/25, धारा 137(2), 310(2) बीएनएस के तहत जांच शुरू की गई। Fake Kidnapping Case

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने ली मामले की गंभीरता से जानकारी

घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल (भा.पु.से.) ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने सायबर सेल और सीतापुर पुलिस की तीन विशेष टीमों का गठन किया। टीम को स्पष्ट निर्देश दिए गए — मामले की त्वरित जांच करें और सच्चाई का पता लगाएं। Fake Kidnapping Case

50 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले, खुला बड़ा राज

पुलिस टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों के करीब 50 CCTV फुटेज की जांच की। इन फुटेज में स्पष्ट दिखाई दिया कि नाबालिग स्वयं उस स्थान पर जाता हुआ दिख रहा है, जहां से उसने अपहरण की कहानी बताई थी।

संदेह गहराता गया और पुलिस ने बच्चे से सख्ती से लेकिन संवेदनशील तरीके से पूछताछ की। जांच में सामने आया कि बच्चे की बताई घटनाओं में कई विरोधाभास हैं। उसने हर बार नई-नई बातें बताकर पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश की।

’64 लाख की लॉटरी’ से शुरू हुई झूठ की कहानी

पूछताछ में नाबालिग ने आखिरकार सच्चाई कबूल की। उसने बताया कि करीब एक महीने पहले किसी अज्ञात व्यक्ति ने फोन पर बताया था कि उसने 64 लाख रुपये की लॉटरी जीती है। उसी व्यक्ति ने घटना से चार दिन पहले दोबारा कॉल करके उसे धर्मजयगढ़ आने को कहा, ताकि इनामी राशि दी जा सके। Fake Kidnapping Case

बच्चे ने बिना किसी को बताए घर से ट्यूशन के बहाने धर्मजयगढ़ पहुंचने की कोशिश की, लेकिन वहां पहुंचने पर जब उस व्यक्ति का मोबाइल बंद मिला, तो वह घबरा गया। उधर, घर जाने में देर हो गई थी, इसलिए डर के मारे उसने अपने अपहरण और लूट की झूठी कहानी बना ली। Fake Kidnapping Case

बाइक और स्कूल बैग मिला पुलिस को

नाबालिग ने पुलिस को बताया कि उसने अपनी मोटरसाइकिल और स्कूल बैग को पत्थलगांव के लुडेंग मार्ग पर एक किराना दुकान के पास छोड़ दिया था। बाद में उसने दूसरे वाहन से लिफ्ट ली और चिखलीपानी के जंगल के पास जाकर ट्रैक्टर चालक से मोबाइल मांगकर फर्जी कहानी सुनाई। Fake Kidnapping Case

पुलिस ने बच्चे की निशानदेही पर स्कूल बैग और मोटरसाइकिल दोनों बरामद कर लिए।

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टीम की मेहनत और त्वरित कार्रवाई

इस पूरे मामले के खुलासे में सीतापुर थाना प्रभारी निरीक्षक सी.आर. चंद्रा, साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक विवेक सेंगर, उप निरीक्षक रघुनाथ राम भगत, सहायक उप निरीक्षक अजीत मिश्रा, प्रधान आरक्षक भोजराज पासवान, नीरज पांडेय, आरक्षक मनीष सिंह, अशोक यादव, अनुज जायसवाल और राकेश यादव की भूमिका अहम रही। Fake Kidnapping Case

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टीम ने तकनीकी और मानवीय दोनों स्तर पर जांच कर यह साबित किया कि पूरी घटना मनगढ़ंत थी।

पुलिस की सतर्कता से समय रहते सच सामने आया

अगर पुलिस इतनी तेजी और सूझबूझ से काम न करती, तो यह मामला एक गंभीर अपराध के रूप में समाज में गलत संदेश दे सकता था। सच्चाई यह है कि नाबालिग ने सिर्फ डर और झिझक के कारण झूठ का सहारा लिया था।

फिलहाल, पुलिस ने नाबालिग और उसके परिजनों को समझाइश दी है कि ऐसी घटनाओं से न केवल पुलिस बल की मेहनत व्यर्थ जाती है, बल्कि निर्दोष लोगों पर भी गलत शक उत्पन्न हो सकता है। Fake Kidnapping Case

सीतापुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई और साइबर टीम की तकनीकी जांच ने साबित कर दिया कि सच कितना भी छिपाया जाए, देर-सवेर सामने आ ही जाता है। यह घटना समाज के लिए एक सबक है — कि डर या गलती छिपाने के लिए झूठ बोलना कभी सही रास्ता नहीं होता।

सरगुजा पुलिस की सजगता और पेशेवर रवैये ने एक बड़ी झूठी कहानी का सच उजागर कर दिया।\

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