रविशंकर सोनी, पन्ना/पवई। Karwa Chauth 2025 करवा चौथ का पर्व आते ही पन्ना और पवई के बाजारों में रौनक लौट आई है। हर तरफ सजी-धजी दुकानें, रंग-बिरंगी चुनरियाँ, मिट्टी के करवे और श्रृंगार का सामान खरीदती महिलाएं नजर आ रही हैं। सुहागन महिलाओं के लिए यह दिन सालभर का सबसे खास दिन माना जाता है। पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए यह व्रत बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जाता है।
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कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह पर्व हर सुहागिन के जीवन में बेहद महत्व रखता है। इस दिन विवाहित महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला उपवास रखती हैं, यानी पूरे दिन न तो एक बूंद पानी पीती हैं और न ही कुछ खाती हैं। शाम को चांद निकलने के बाद चलनी से चंद्र दर्शन कर अपने पति के हाथों से जल और फल ग्रहण कर व्रत का पारण करती हैं। Karwa Chauth 2025
महिलाओं की महीनों से चल रही तैयारी, बाजार में बढ़ी चहल-पहल
करवा चौथ को लेकर तैयारियां महीनों पहले से शुरू हो जाती हैं। महिलाएं इस दिन के लिए नए कपड़े, गहने और श्रृंगार का सामान जुटाती हैं। पन्ना और पवई के बाजारों में इन दिनों यही नज़ारा देखने को मिल रहा है। कपड़ा दुकानों, जनरल स्टोर्स और ब्यूटी पार्लरों में महिलाओं की भीड़ लगी हुई है। Karwa Chauth 2025
बाजारों में मिट्टी के करवे, उरई (छलनी), पूजा थाल और सजावटी दीपक की खरीदारी जोरों पर है। दुकानदारों के मुताबिक इस बार करवे की कीमत 50 रुपए से लेकर 150 रुपए तक है। वहीं, सोलह श्रृंगार का पूरा सेट 200 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक बिक रहा है। Karwa Chauth 2025
भक्ति और आस्था से भरा दिन, पतियों की लंबी उम्र की कामना में महिलाएं रखती हैं व्रत
करवा चौथ का व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।
पवई निवासी सोनू कोल बताती हैं कि यह व्रत बहुत कठिन होता है क्योंकि दिनभर बिना पानी पिए रहना आसान नहीं होता, लेकिन पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना में यह तप हर महिला खुशी-खुशी करती है। Karwa Chauth 2025
वहीं, दुर्गेश्वरी खम्परिया कहती हैं कि “शाम को चंद्रमा की पूजा के बाद जब पति अपने हाथों से जल और जूस पिलाते हैं, तो सारी थकान मिट जाती है। यही पल सबसे सुखद और भावनात्मक होता है।” Karwa Chauth 2025
मीनू बागरी का कहना है कि “यह व्रत हमारी संस्कृति की पहचान है। सोलह श्रृंगार करके जब महिलाएं पूजा करती हैं, तो पूरा वातावरण भक्ति और प्रेम से भर जाता है।” Karwa Chauth 2025
सुबह से शुरू होती पूजा की तैयारी, शाम को होता पारंपरिक करवा चौथ पूजन
करवा चौथ की सुबह महिलाएं जल्दी उठकर स्नान करती हैं और सास या घर की बड़ी महिला के हाथों से सरगी (फलों और मिठाई का पारंपरिक भोजन) ग्रहण करती हैं। इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को महिलाएं सोलह श्रृंगार करके समूह में या घर पर एकत्रित होकर पूजा करती हैं।
पूजन के दौरान मिट्टी से बने करवे में जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। महिलाएं चलनी के माध्यम से पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं। इस दौरान वे भगवान से अपने पति की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। उसके बाद पति के हाथों से जल, जूस या फल ग्रहण कर व्रत का समापन करती हैं। Karwa Chauth 2025
करवा चौथ से जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं
पुराणों के अनुसार, करवा चौथ का व्रत सबसे पहले वीरवती नामक रानी ने रखा था। कहा जाता है कि अपने पति की जान बचाने के लिए उसने पूरा दिन निर्जला उपवास किया था। उसकी सच्ची श्रद्धा और प्रेम से प्रभावित होकर यमराज ने उसके पति को जीवनदान दिया। तभी से यह परंपरा शुरू हुई और आज भी महिलाएं उसी आस्था के साथ यह व्रत रखती हैं। Karwa Chauth 2025
इस दिन सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व होता है। महिलाएं लाल साड़ी, चूड़ियाँ, सिंदूर, बिंदिया, बिछुए और पायल पहनती हैं, जिससे उनका श्रृंगार पूर्ण माना जाता है। पूजा के समय सुहाग की थाली सजाई जाती है जिसमें दीया, चावल, कुमकुम, करवा और मिठाई रखी जाती है। Karwa Chauth 2025
त्योहार से चमका बाजार, दुकानदारों को मिली राहत
करवा चौथ से पहले आई खरीदारों की भीड़ ने बाजार में रौनक बढ़ा दी है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से मंदी के बीच यह त्योहार व्यापार के लिए राहत लेकर आया है। सजावटी करवा, पूजा की थालियां, कपड़े और सौंदर्य उत्पादों की मांग में 30 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। Karwa Chauth 2025
ब्यूटी पार्लरों में भी इन दिनों बुकिंग फुल है। महिलाएं करवा चौथ की शाम के लिए स्पेशल मेकअप और हेयर स्टाइल की बुकिंग पहले से करा रही हैं। Karwa Chauth 2025
आस्था और प्रेम का अनोखा संगम है करवा चौथ
करवा चौथ का पर्व भारतीय नारी के समर्पण, आस्था और प्रेम का प्रतीक है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच आत्मीय संबंध को और गहराई देने वाला दिन है। जैसे-जैसे चांद आसमान में उगता है, वैसे-वैसे सभी महिलाएं खुशी से झूम उठती हैं और पति के हाथों से पहला जल ग्रहण कर इस पवित्र व्रत का समापन करती हैं।
पन्ना और पवई के बाजारों में इन दिनों जो रौनक है, वह सिर्फ एक त्योहार की नहीं, बल्कि परंपरा और प्रेम के संगम की झलक दिखा रही है।
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