देश विदेश जनसम्पर्क उत्तरप्रदेश मौसम सक्सेस स्टोरी खेल एजुकेशन कृषि राशिफल धर्म

Jal Kumbhi छत्तीसगढ़ में जलकुंभी बनेगी वरदान: IIT भिलाई के सहयोग से बनेगा फाइबर और कपड़ा

Jal Kumbhi छत्तीसगढ़ में अब जलकुंभी से कपड़ा बनेगा। राज्य सरकार और IIT भिलाई की साझेदारी में शुरू हुई यह अनोखी परियोजना पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार दोनों के लिए वरदान साबित होगी।

On: October 9, 2025 3:34 PM
Follow Us:
Jal Kumbhi

प्रदीप कुमार दुर्ग , Jal Kumbhi छत्तीसगढ़ में नदियों, तालाबों और जलाशयों को ढकने वाली जलकुंभी अब मुसीबत नहीं, बल्कि एक वरदान बनने जा रही है। राज्य सरकार ने आईआईटी भिलाई के साथ मिलकर एक ऐसी अनोखी पहल शुरू की है, जिसके तहत जलकुंभी के रेशों से कपड़ा तैयार किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का भी काम करेगा।

दुर्ग में हुई अहम बैठक – तय हुई नई दिशा

दुर्ग में आयोजित एक बैठक में ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव और आईआईटी भिलाई के प्रोफेसर एस. एम. घोष की मौजूदगी में इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रोफेसर घोष ने बताया कि आईआईटी भिलाई की टीम पिछले कुछ महीनों से जलकुंभी से तीन प्रमुख उत्पाद बनाने पर काम कर रही है। Jal Kumbhi

https://dainikhistory.com/

इन उत्पादों में शामिल हैं:

  1. जलकुंभी के रेशों से फाइबर और फिर कपड़ा बनाना
  2. जलकुंभी से बायो चार तैयार करना
  3. वेस्ट टू हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करना

जलकुंभी से तैयार होगा कपड़ा, शुरू हुआ प्रयोगात्मक उत्पादन

प्रोफेसर एस. एम. घोष ने बताया कि आईआईटी भिलाई में जलकुंभी के रेशों को फाइबर में बदलने की मशीन इंस्टॉल की जा चुकी है। शुरुआती चरण में प्रयोगात्मक उत्पादन भी शुरू कर दिया गया है। इन रेशों से बनाए गए धागे को स्थानीय बुनकरों की मदद से कपड़े में बदला जाएगा। इससे न केवल पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि ग्रामीणों को रोजगार के नए मौके भी मिलेंगे। Jal Kumbhi

https://twitter.com/DainikHistory?t=un2EfdiIG8L5BD8EkPp2qg&s=08

उन्होंने आगे बताया कि जलकुंभी से तैयार बायो चार (Biochar) मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने में मदद करेगा। अगर इसे खेतों में मिलाया जाए तो यह प्राकृतिक खाद की तरह काम करेगा। वहीं, तालाबों और झीलों में डालने से यह पानी को फिल्टर करने का काम करेगा और जल गुणवत्ता में सुधार लाएगा। Jal Kumbhi

ग्रामोद्योग मंत्री बोले – यह छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनेगी

ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि यह परियोजना केंद्र सरकार की “वेस्ट टू वेल्थ” योजना का हिस्सा है और छत्तीसगढ़ इसमें देश का अग्रणी राज्य बन सकता है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी आईआईटी भिलाई होगी और इसका पहला कपड़ा निर्माण प्लांट दुर्ग जिले के चंद्राकुरी स्थित रीपा सेंटर (Repa Center) में स्थापित किया जाएगा। Jal Kumbhi

मंत्री यादव ने कहा,

“यह योजना पर्यावरण के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका के लिए वरदान साबित होगी। इससे ग्रामीण महिलाएं, बुनकर और युवाओं को घर-गांव में ही रोजगार मिलेगा। जो जलकुंभी अब तक परेशानी मानी जाती थी, वही अब लोगों की आय का जरिया बनेगी।” Jal Kumbhi

दुर्ग में आईटी पार्क और टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट की भी योजना

बैठक में मंत्री यादव ने यह भी बताया कि दुर्ग जिले में जल्द ही आईटी पार्क स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही धमधा क्षेत्र में टमाटर प्रसंस्करण यूनिट (Tomato Processing Unit) लगाने की योजना पर भी काम चल रहा है। इससे जिले में उद्योग और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। Jal Kumbhi

उन्होंने कहा कि ग्रामोद्योग विभाग लगातार ऐसे नवाचारों को बढ़ावा दे रहा है जो “लोकल टू ग्लोबल” की सोच को मजबूत करें। जलकुंभी से कपड़ा निर्माण परियोजना इसी दिशा में उठाया गया एक अभिनव कदम है। Jal Kumbhi

जलकुंभी से साफ होंगे जलाशय और बढ़ेगी हरियाली

इस परियोजना से न केवल रोजगार बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। तालाबों, नदियों और जलाशयों में फैली जलकुंभी पानी की सतह पर ऑक्सीजन की कमी और प्रदूषण का कारण बनती है। अब जब इसे फाइबर के रूप में उपयोग किया जाएगा, तो यह जलाशयों की सफाई में मदद करेगी। इससे पानी के जीव-जंतुओं को भी लाभ होगा और जल स्रोत लंबे समय तक संरक्षित रहेंगे। Jal Kumbhi

इसके अलावा, बायो चार के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और किसानों को रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी। यानी यह परियोजना खेती से लेकर पर्यावरण तक, हर स्तर पर फायदेमंद साबित हो सकती है। Jal Kumbhi

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई उम्मीद

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आजीविका मिशन पहले से ही महिलाओं और युवाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में कई कदम उठा रहा है। अब इस प्रोजेक्ट के जरिए रीपा केंद्रों (Rural Industrial Parks) में नई संभावनाएं पैदा होंगी। यहां ग्रामीण महिलाएं जलकुंभी इकट्ठा करने, रेशे तैयार करने और धागा बुनने के काम में जुड़ सकेंगी। Jal Kumbhi

यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में कचरे से कंचन बनाने (Waste to Wealth) का बेहतरीन उदाहरण होगी। राज्य सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के “जलकुंभी फाइबर” से बने कपड़े देशभर में प्रसिद्ध होंगे। Jal Kumbhi

नवाचार और पर्यावरण का संगम

छत्तीसगढ़ सरकार और आईआईटी भिलाई की यह साझेदारी न केवल वैज्ञानिक नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह ग्रामीण विकास और पर्यावरण संतुलन की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम भी है। Jal Kumbhi
जहां एक ओर जलकुंभी से जलाशयों की सफाई होगी, वहीं दूसरी ओर इससे तैयार कपड़ा, बायो चार और अन्य उत्पाद ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाएंगे। Jal Kumbhi

छत्तीसगढ़ की यह पहल साबित कर रही है कि सही सोच और तकनीक के मिलन से हर समस्या को अवसर में बदला जा सकता है — बिल्कुल उसी तरह जैसे कभी अभिशाप मानी जाने वाली जलकुंभी अब प्रदेश की “हरित संपदा” बनने जा रही है। Jal Kumbhi

[URIS id=5981]

Join WhatsApp

Join Now

- Join Arattai

Join Now

और पढ़ें

Tirupati Bus Accident

Tirupati Bus Accident तिरुपति दर्शन जा रही बस हादसे का शिकार, बस्तर के तारा गांव में 1 यात्री की मौत, कई घायल

Food poisoning

Food poisoning मोमोज खाने से बिगड़ी सेहत: मगरलोड ब्लॉक के कई गांवों में फूड पॉइजनिंग का असर, बच्चों की संख्या ज्यादा

Illegal paddy transport

Illegal paddy transport अवैध धान परिवहन रोकने गई टीम पर हमला, दो आरोपी जेल, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Sukma Rehabilitated Youth

Sukma Rehabilitated Youth: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लगाई चौपाल, दस्तावेज़ बनवाने में खुद किया सहयोग

Eklavya School Chichadi Annual Fest 2025

Eklavya School Chichadi Annual Fest 2025: “उड़ान” थीम पर वार्षिक उत्सव, विज्ञान प्रदर्शनी और आनंद मेला शानदार अंदाज़ में सम्पन्न

Kondagaon News

Kondagaon News बंजारा समाज के धर्मगुरु संत सेवालाल महाराज की मूर्ति का अपमान, एसपी व एसडीएम से की गई शिकायत — समाज में गहरा आक्रोश

Leave a Comment

error: Content is protected !!