फरसगांव। Wildlife Conservation Week राष्ट्रीय वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के अवसर पर सोमवार को वन विभाग ने आलोर गांव में जागरूकता से भरपूर कार्यक्रमों का आयोजन किया। केशकाल वनमंडल अधिकारी श्रीमती दिव्या गौतम के निर्देशन और बड़ेडोंगर वन परिक्षेत्र अधिकारी नरेंद्र मेश्राम के नेतृत्व में इस विशेष आयोजन को संपन्न कराया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों और बच्चों में वन्यजीवों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना रहा।
स्कूल में प्रतियोगिताओं से बढ़ी बच्चों की रुचि
आलोर के शासकीय हाई स्कूल में वन विभाग की टीम ने बच्चों के बीच निबंध, चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की। इन प्रतियोगिताओं का मुख्य विषय था — वन्य प्राणी हमारे मित्र, प्रकृति की रक्षा, जीवन की रक्षा जैसे विषय, जिन पर बच्चों ने अपने विचार और कलात्मकता के जरिए शानदार प्रदर्शन किया। Wildlife Conservation Week
प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपने भाषणों में बताया कि किस तरह वन्य जीव पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखते हैं और मनुष्य के जीवन से उनका गहरा संबंध है। Wildlife Conservation Week
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जनजागरूकता रैली से गूंजा गांव
कार्यक्रम के बाद वन विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने मिलकर जनजागरूकता रैली निकाली। यह रैली पूरे आलोर गांव में घूमी और “वन्यजीवों की रक्षा करो, प्रकृति को सहेज कर रखो” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।
रैली का उद्देश्य था कि ग्रामीण समुदायों को यह समझाया जाए कि वन्य प्राणियों का अस्तित्व मानव जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है, और उनके संरक्षण से ही प्राकृतिक संतुलन बना रह सकता है। रैली में बच्चों ने रंगीन पोस्टर और बैनर के जरिए लोगों को संदेश दिए कि जंगल और जानवर दोनों हमारी धरोहर हैं, जिन्हें बचाना हमारी जिम्मेदारी है। Wildlife Conservation Week
अधिकारियों की अपील – वन्यजीवों को सुरक्षा देना सबका कर्तव्य
बड़ेडोंगर वन परिक्षेत्र अधिकारी नरेंद्र मेश्राम ने बताया कि राष्ट्रीय वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह मनाने का उद्देश्य केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह लोगों को संवेदनशील बनाने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामीण और आम नागरिक वन्यजीव संरक्षण के महत्व को नहीं समझेंगे, तब तक जंगलों और उनमें रहने वाले जीवों की सुरक्षा संभव नहीं है।
फरसगांव परिक्षेत्र के आर.एस. यादव, डिप्टी रेंजर शिवनाथ सेठिया, मानसिंग नेताम, वासुदेव डहरिया सहित वन विभाग के कई अधिकारी-कर्मचारी इस आयोजन में मौजूद रहे। Wildlife Conservation Week
ग्रामीणों ने सराहा पहल
गांव के शिक्षकों और अभिभावकों ने वन विभाग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों में न केवल ज्ञान बढ़ाते हैं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं।
शिक्षकगणों का कहना था कि जब बच्चे छोटी उम्र से ही पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के बारे में जानेंगे, तो आगे चलकर वे समाज में जागरूक नागरिक बनकर सकारात्मक बदलाव ला सकेंगे। Wildlife Conservation Week
वन विभाग की आगामी योजनाएं
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आने वाले दिनों में अन्य गांवों और स्कूलों में भी आयोजित किए जाएंगे। विभाग का लक्ष्य है कि समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचे कि प्रकृति, जंगल और वन्यजीव हमारे अस्तित्व के लिए जरूरी हैं। Wildlife Conservation Week
कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों और ग्रामीणों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने आसपास के जंगलों और जीवों की रक्षा करेंगे और किसी भी तरह की अवैध शिकार या वन्यजीवों से जुड़ी गतिविधि की जानकारी तुरंत वन विभाग को देंगे।
राष्ट्रीय वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह का यह आयोजन आलोर गांव में न केवल बच्चों के लिए एक सीखने का अवसर बना, बल्कि पूरे गांव में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना भी जागृत की। वन विभाग की यह पहल निश्चित रूप से आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित होगी। Wildlife Conservation Week