मथुरा/वृंदावन। Droupadi Murmu Vrindavan Visit भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को वृंदावन और मथुरा का विशेष दौरा किया। यह यात्रा पूरी तरह से धर्म, अध्यात्म और भक्ति की भावनाओं से ओत-प्रोत रही। राष्ट्रपति ने न सिर्फ बांके बिहारी मंदिर और निधिवन राज में पूजा-अर्चना की, बल्कि सुदामा कुटी आश्रम में लोकार्पण कर वृंदावन की आध्यात्मिक परंपरा को और सशक्त किया।
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भव्य स्वागत से हुआ आगमन
सुबह करीब 10 बजे राष्ट्रपति मुर्मू वृंदावन रोड रेलवे स्टेशन पहुंचीं। स्टेशन का माहौल एक उत्सव जैसा था। जगह-जगह फूलों की सजावट, ढोल-नगाड़ों की गूंज और ‘राष्ट्रपति जिंदाबाद’ के नारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, महापौर विनोद कुमार अग्रवाल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी स्वयं मौजूद रहे। स्टेशन को खासतौर पर दुल्हन की तरह सजाया गया था। Droupadi Murmu Vrindavan Visit
बांके बिहारी मंदिर में दर्शन
स्टेशन से राष्ट्रपति का काफिला सीधे ठाकुर बांके बिहारी मंदिर पहुँचा। भीड़भाड़ से बचने के लिए वे गोल्फ कार्ट से परिक्रमा मार्ग से होते हुए मंदिर तक पहुँचीं। यहां राष्ट्रपति ने अपनी बेटी, दामाद और बच्चों के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने ठाकुर जी को रोली, सतिया, चावल अर्पित किए और घी का बड़ा दीपक प्रज्वलित किया। Droupadi Murmu Vrindavan Visit
इस खास अवसर पर आम भक्तों का प्रवेश रोक दिया गया था ताकि राष्ट्रपति निर्बाध भाव से दर्शन कर सकें। मंदिर प्रशासन ने वीआईपी कटघरा भी हटवा दिया था, जिससे उन्हें ठाकुर जी के सहज और नजदीकी दर्शन मिल सके। राष्ट्रपति लंबे समय तक बांके बिहारी के दर्शन करती रहीं और भाव-विभोर हो गईं। Droupadi Murmu Vrindavan Visit
निधिवन राज मंदिर में पूजा और भेंट
इसके बाद राष्ट्रपति निधिवन राज मंदिर पहुँचीं। यहाँ उन्हें पारंपरिक पटका पहनाकर सम्मानित किया गया। खास बात यह रही कि ठाकुर जी का रात्रि शयन श्रृंगार उनकी ओर से संपन्न हुआ। इसकी संपूर्ण सामग्री राष्ट्रपति ने स्वयं भेंट की।
उन्होंने रंग महल में करीब 10 मिनट तक पूजा की और निधिवन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को भी जाना। मंदिर प्रशासन ने उन्हें और उनके परिवार को चांदी की बांसुरी भेंट कर सम्मानित किया। Droupadi Murmu Vrindavan Visit
सुदामा कुटी आश्रम का लोकार्पण
दौरे की अगली कड़ी में राष्ट्रपति सुदामा कुटी आश्रम पहुँचीं। यहां उन्होंने सुदामा दास महाराज की भजन कुटी का लोकार्पण किया। साथ ही अपनी माता जी की स्मृति में एक कल्पवृक्ष का पौधा रोपा। आश्रम में आयोजित गौ-सेवा कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने गौ-पूजा भी की और आशीर्वाद लिया। यह पल पूरी तरह से भक्तिभाव और भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाने वाला रहा।
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सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रशासन पहले से ही सतर्क था। सुरक्षा के लिए सेना, पुलिस, जीआरपी और एसपीजी की विशेष तैनाती की गई। यहां तक कि वृंदावन के प्रसिद्ध बंदरों से बचाव के लिए लंगूरों को भी लगाया गया। हर स्थान पर चाक-चौबंद व्यवस्था दिखी।
सुदामा कुटी आश्रम में लगभग 30 मिनट बिताने के बाद राष्ट्रपति का काफिला होटल रेडिसन पहुँचा, जहां उन्होंने विश्राम और भोजन किया। Droupadi Murmu Vrindavan Visit
कृष्ण जन्मभूमि की ओर बढ़ा काफिला
वृंदावन की इस आध्यात्मिक यात्रा के बाद राष्ट्रपति का काफिला मथुरा के लिए रवाना हुआ। यहां उन्होंने कृष्ण कुब्जा मंदिर और श्री कृष्ण जन्मभूमि के दर्शन करने का कार्यक्रम तय किया। Droupadi Murmu Vrindavan Visit
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व का अनुभव
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा वृंदावन और मथुरा की धार्मिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर और भी विशेष बना गया। बांके बिहारी मंदिर से लेकर निधिवन और सुदामा कुटी आश्रम तक उनकी यात्रा ने यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें गहरी हैं और अध्यात्म से जुड़ाव ही जीवन को सार्थक बनाता है। Droupadi Murmu Vrindavan Visit
यह यात्रा न सिर्फ सुरक्षा और व्यवस्थाओं का उदाहरण बनी, बल्कि भक्ति और श्रद्धा का भी अद्भुत संगम पेश किया। वृंदावन की पवित्रता को महसूस करते हुए राष्ट्रपति का भावनात्मक जुड़ाव हर किसी को प्रेरित करने वाला रहा।