प्रदीप कुमार दुर्ग भिलाई। Bhilai social work भिलाई को लोग अक्सर इस्पात नगरी और औद्योगिक पहचान के लिए जानते हैं, लेकिन यहां का मानवीय पहलू भी किसी से कम नहीं है। हाल ही में शहर ने इंसानियत और भाईचारे की ऐसी मिसाल देखी, जिसने सभी का दिल छू लिया।
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कृष्ण नगर स्थित सुलभ परिसर में रहने वाले असलम खान की अचानक मौत हो गई। असलम अपने पीछे तीन मासूम बच्चों को छोड़ गए, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। घर का हाल बेहाल था और परिवार पूरी तरह से टूट चुका था। इसी बीच खबर पहुंची यूथ सिख सेवा समिति तक। Bhilai social work
सिख समाज ने बढ़ाया मदद का हाथ
समिति के कोषाध्यक्ष सरदार मलकीत सिंह को जैसे ही यह जानकारी मिली, उन्होंने इसकी खबर अध्यक्ष इंदरजीत सिंह तक पहुंचाई। असलम खान भले ही मुस्लिम समाज से थे, लेकिन इंदरजीत सिंह ने बिना किसी भेदभाव के तुरंत मदद का फैसला किया। उन्होंने न सिर्फ असलम खान के अंतिम संस्कार का जिम्मा उठाया, बल्कि बच्चों के लिए खाने-पीने और जरूरी व्यवस्थाओं का भी इंतजाम किया। Bhilai social work
इंदरजीत सिंह ने इस नेक कार्य के लिए मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों से भी संपर्क किया और कहा कि यह इंसानियत का मामला है, इसमें सबको साथ आना चाहिए। Bhilai social work
मुस्लिम समाज भी बना हमसफर
इंसानियत की इस पुकार को सुनकर हुसैनी सेना के अध्यक्ष सोहेल खान अपनी टीम के साथ पहुंचे। उनके साथ भिलाई जन सेवा से निजाम खान, जुल्फिकार और इशरद अहमद भी इस अभियान में शामिल हुए। सभी ने मिलकर असलम खान का अंतिम संस्कार मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार 23 सितंबर को कराया। Bhilai social work
इस दौरान इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए दोनों समाजों ने मिलकर न केवल दुखी परिवार का सहारा बना, बल्कि यह संदेश भी दिया कि धर्म और जाति से ऊपर उठकर इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। Bhilai social work
पुलिस ने भी निभाया अहम रोल
इस नेक काम में सुपेला पुलिस थाने का भी सहयोग काबिल-ए-तारीफ रहा। पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा और देखरेख के साथ-साथ प्रक्रिया को पूरा करने में पूरा सहयोग दिया। यह सहयोग बताता है कि जब समाज और प्रशासन साथ आएं तो किसी भी दुख को कम करना आसान हो जाता है। Bhilai social work
भाईचारे का अद्भुत उदाहरण
इस पूरे घटनाक्रम ने भिलाई की पहचान को और मजबूत कर दिया है। यहां सिख और मुस्लिम समाज ने मिलकर न सिर्फ एक परिवार का दुख बांटा, बल्कि समाज के सामने एक नई मिसाल रखी। बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी लेने से लेकर अंतिम संस्कार तक हर कदम पर इंसानियत की झलक देखने को मिली। Bhilai social work
यह घटना हमें यह सिखाती है कि समाज की असली ताकत उसकी एकता और भाईचारे में है। जब भी इंसानियत पुकारे, तो धर्म और जाति की दीवारें टूट जानी चाहिए। यही असली भारत की पहचान है, जहां हर मज़हब के लोग मिलकर इंसानियत को जिंदा रखते हैं।
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