मथुरा। Krishna Das Jayanti ब्रज संस्कृति और साहित्य को नई पहचान दिलाने वाले अष्टछाप के महान कवि श्री कृष्ण दास जी की जयंती इस बार बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। ब्रज साहित्य परिषद न्यास के तत्वावधान में जतीपुरा स्थित बिछुआ कुंड पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में क्षेत्रभर के कवि, विद्वान और श्रद्धालु एकत्र हुए।
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काव्य गोष्ठी में छलका भक्ति रस
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा काव्य गोष्ठी, जिसकी अध्यक्षता बलदेव से आए स्वर कोकिल कवि राधा गोविंद पाठक ने की। उन्होंने अपनी मधुर कविता में कृष्ण दास जी के जीवन, उनकी भक्ति और काव्य साधना का बेहद सुंदर चित्रण किया। श्रोताओं ने तालियों और जयकारों से उनका उत्साह बढ़ाया। Krishna Das Jayanti
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इसी दौरान ब्रज साहित्य परिषद न्यास के महामंत्री कवि हरी बाबू ओम ने अपनी भक्ति से ओतप्रोत रचना “कर ले कर ले यारी, कर ले सबके यार सांवरिया से” सुनाकर वातावरण को भक्ति रस से भर दिया और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। Krishna Das Jayanti
कवियों ने किया जीवन व्रत पर प्रकाश
काव्य गोष्ठी में कवि गोपाल प्रसाद उपाध्याय ने कृष्ण दास जी के जीवन व्रत और साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृष्ण दास जी की रचनाएँ आज भी भक्ति रस की धारा को जीवंत बनाए हुए हैं। Krishna Das Jayanti
वहीं कवि अनिल शर्मा ने बिछुआ कुंड और कृष्ण दास जी की साधना स्थली को अपनी कविता के माध्यम से भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में कवि दिवाकर शर्मा ने कृष्ण दास जी के पद को गाकर वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।
श्रद्धा और उत्साह से उमड़े लोग
इस विशेष आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साहित्य प्रेमी शामिल हुए। मुख्य रूप से धीरज कौशिक, सुरेश चंद शर्मा और बैठक की सेवायत मुखिया जी सहित कई गणमान्य वैष्णव उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर से कृष्ण दास जी के भक्ति भाव को नमन किया और उनके पदों को ब्रज की अमूल्य धरोहर बताया। Krishna Das Jayanti
ब्रज साहित्य परिषद की सराहनीय पहल
ब्रज साहित्य परिषद न्यास द्वारा किया गया यह आयोजन ब्रज संस्कृति और साहित्य की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सराहनीय प्रयास माना जा रहा है। परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल समाज में भक्ति भावना को जागृत करते हैं बल्कि युवाओं को ब्रज की सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ते हैं। Krishna Das Jayanti
कृष्ण दास जी और अष्टछाप की परंपरा
अष्टछाप ब्रज साहित्य और भक्ति आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसमें सूरदास, कुंभनदास, परमानंददास जैसे महान कवियों के साथ ही कृष्ण दास जी का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। उनकी कविताएँ और पद भक्ति, माधुर्य और समर्पण के अनमोल उदाहरण हैं। Krishna Das Jayanti
ब्रज के रसिक जन मानते हैं कि कृष्ण दास जी के पदों में भक्ति की वह मधुर धारा बहती है, जो मनुष्य को सीधे श्रीकृष्ण की दिव्य लीला से जोड़ देती है। यही कारण है कि आज भी उनके पद मंदिरों में गाए जाते हैं और श्रद्धालुओं के हृदय को स्पर्श करते हैं।
आयोजन ने जगाई सांस्कृतिक चेतना
इस जयंती समारोह ने न केवल कृष्ण दास जी की स्मृति को जीवंत किया बल्कि ब्रजवासियों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ा। काव्य गोष्ठी में जब-जब कवियों ने भक्ति रस से परिपूर्ण रचनाएँ सुनाईं, तब-तब पूरा वातावरण “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा। Krishna Das Jayanti
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित भक्तों और कवियों ने बिछुआ कुंड पर सामूहिक रूप से कृष्ण दास जी को नमन करते हुए उनकी जयंती को यादगार बनाया। Krishna Das Jayanti