फरसगांव। rural road repair विकासखंड माकड़ी के जरंडी गांव के लोग अपनी सड़क की बदहाली से परेशान होकर अब खुद मरम्मत करने में जुट गए हैं। गांव की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी यह सड़क महज पांच साल पहले, 17 दिसंबर 2019 को बनकर तैयार हुई थी, लेकिन अब इसकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि बड़े-बड़े गड्ढों और कीचड़ के कारण सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है।
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ग्रामीणों का कहना है
कि सड़क पर गड्ढों के कारण बच्चों का स्कूल जाना, बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना और खेती-बाड़ी का काम करना मुश्किल हो गया है। बारिश में सड़क की फिसलन और कीचड़ दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा देते हैं। इस स्थिति ने गांव वालों को मजबूर कर दिया कि वे अपने संसाधनों से ही फावड़ा उठाकर मुरम डालें और सड़क को इस्तेमाल योग्य बनाने का प्रयास करें।
सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इसे सुधारने के लिए पहले भी कई प्रयास किए जा चुके हैं। जरंडी सड़क पर अब तक दो बार डामरीकरण और तीन बार पेच मरम्मत का काम हो चुका है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। यह सवाल उठता है कि केवल पांच साल में सड़क इतनी खराब कैसे हो गई? ग्रामीण इसे ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की निशानी मानते हैं। rural road repair
सरपंच सुरेंद्र पोयाम ने कहा,
“सड़क की खराब हालत का जिम्मेदार सीधे तौर पर अधिकारी और ठेकेदार हैं। शासन अपना काम पूरा कर रहा है, लेकिन निर्माण में इतनी गड़बड़ी हुई है कि हम ही अब खुद सड़क की मरम्मत कर रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए हमें यह कदम उठाना पड़ा।” rural road repair
सड़कें गुणवत्ता मानकों के अनुसार बननी चाहिए
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कें गुणवत्ता मानकों के अनुसार बननी चाहिए और ठेकेदारों को एक तय अवधि तक उनकी मरम्मत की जिम्मेदारी भी लेनी होती है। अगर सड़क समय से पहले ही खराब हो जाती है, तो यह सीधे तौर पर निर्माण में लापरवाही और भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है। rural road repair
गांव के एक बुजुर्ग ने कहा, “सड़क बनी थी तो उम्मीद थी कि यह लंबे समय तक सही रहेगी। लेकिन अब हर साल मरम्मत की जरूरत पड़ रही है। हमारे बच्चे और बुजुर्ग सुरक्षित नहीं हैं। प्रशासन को जल्द ध्यान देना चाहिए।” rural road repair
स्थानीय लोग बताते हैं
कि सड़क की खराब स्थिति के कारण न सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, बल्कि फसल और कृषि से जुड़े काम भी बाधित हो रहे हैं। ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल से आवाजाही मुश्किल हो गई है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। rural road repair
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ग्रामीणों ने मिलकर तय किया है कि मुरम डालकर सड़क को अस्थायी रूप से सही किया जाएगा, ताकि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने खुद फावड़े उठाए और सड़क पर मुरम डालना शुरू कर दिया। यह कदम गांव के लोगों की आपसी सहमति और सामूहिक प्रयास का प्रतीक है। rural road repair
सरपंच सुरेंद्र पोयाम ने आगे कहा, “हमारे प्रयास अस्थायी समाधान हैं। असली जिम्मेदारी अधिकारियों और ठेकेदार की है। अगर वे समय रहते सड़क का निर्माण सही तरीके से करते और गुणवत्ता बनाए रखते, तो यह समस्या इतनी जल्दी पैदा नहीं होती। हम सरकार से भी मांग करते हैं कि सड़क का स्थायी समाधान निकाले।” rural road repair
PMGSY के तहत बनी सड़कों के रखरखाव के लिए ठेकेदारों को समय सीमा तक जिम्मेदार ठहराया जाता है। अगर सड़क पांच साल में ही जर्जर हो गई, तो यह स्पष्ट रूप से निर्माण गुणवत्ता में कमी और निगरानी में लापरवाही को दर्शाता है। rural road repair
जरंडी गांव की यह घटना ग्रामीण सड़क निर्माण और रखरखाव में गंभीर कमियों की ओर ध्यान आकर्षित करती है। ग्रामीणों की सक्रियता और समस्या का सामना करने की जिजीविषा सराहनीय है, लेकिन यह प्रशासन और ठेकेदारों के लिए एक चेतावनी भी है कि ग्रामीण सड़कों की सुरक्षा और सुगमता के लिए उनकी जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है। rural road repair
अंततः, जरंडी गांव के लोग यह संदेश दे रहे हैं कि जब तक अधिकारी और ठेकेदार अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते, तब तक ग्रामीण खुद ही अपनी सुरक्षा और सुविधा के लिए कदम उठाने को तैयार हैं।