रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के ( Samajik Samrasta ) उदयपुरा तहसील के पिपरिया पुंआरिया गांव में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सामाजिक भेदभाव और जातिगत सोच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यहां अनुसूचित जाति (SC) समाज के संतोष परोचे के घर भोजन करने पर चार लोगों को पंचायत ने समाज से बहिष्कृत कर दिया। मामला जब तूल पकड़ने लगा तो इस पर राज्य मंत्री और स्थानीय विधायक नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बड़ा कदम उठाते हुए खुद उसी परिवार के घर जाकर भोजन किया।
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मंत्री पटेल के इस साहसिक फैसले को सोशल मीडिया पर खूब सराहना मिल रही है और लोग इसे सामाजिक समरसता की दिशा में बड़ा संदेश मान रहे हैं। ( Samajik Samrasta )
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वही मंत्री के साथ भोजन करने वाले लोगों की भी सराहना की जा रही है लोग खूब पोस्ट बनाकर उनको वायरल कर रहे हैं जिसको बहुत लोग पसंद कर रहे हैं।
पंचायत का विवादित फैसला
गांव में श्राद्ध के दौरान कुछ लोग संतोष परोचे के घर भोजन करने पहुंचे थे। संतोष अनुसूचित जाति से आते हैं, इस वजह से पंचायत ने जातिगत आधार पर सख्त रुख अपनाया। पंचायत ने चारों लोगों को समाज से बहिष्कृत करने का ऐलान करते हुए कहा कि जब तक वे गंगा स्नान करके लौटकर भंडारा नहीं कराते, तब तक समाज से उनका बहिष्कार रहेगा। ( Samajik Samrasta )
निर्णय के अनुसार, ऐसे लोगों के घर न तो कोई समाज का व्यक्ति जाएगा और न ही उनके घर होने वाले शादी-ब्याह या धार्मिक आयोजनों में कोई शामिल होगा। यहां तक कि उन्हें समाज के सामूहिक कार्यक्रमों से भी दूर रखने का ऐलान किया गया।
चार में से एक व्यक्ति ने गंगा स्नान करके भंडारा किया और समाज में दोबारा शामिल हो गया, लेकिन बाकी तीन लोगों ने पंचायत का यह आदेश मानने से साफ इनकार कर दिया। ( Samajik Samrasta )
षड्यंत्र का आरोप
भोजन करने वाले चार लोगों में से एक व्यक्ति ने बताया कि उन्हें जानबूझकर षड्यंत्र के तहत फंसाया गया। उनके अनुसार, एक शिक्षक ने उन्हें भोजन के लिए बुलाया और फिर वहां का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। इस वीडियो के आधार पर ही पंचायत ने उनके खिलाफ बहिष्कार का फैसला लिया। ( Samajik Samrasta )
उन्होंने कहा, “हम समाज को जोड़ने का काम करते हैं, लेकिन हमारे ही खिलाफ षड्यंत्र रचा गया। हम आगे भी समाज में एकता बनाए रखने का काम करेंगे, इन फैसलों से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।
मंत्री पटेल का बड़ा कदम
जब यह मामला मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल तक पहुंचा तो उन्होंने साफ कहा कि “मेरे विधानसभा क्षेत्र में सभी मेरे लिए समान हैं।” उन्होंने तुरंत फैसला लिया कि वे खुद अनुसूचित जाति परिवार के घर जाएंगे और भोजन करेंगे।
नवरात्र के पहले दिन मंत्री पटेल अपने कार्यकर्ताओं और भाजपा पदाधिकारियों के साथ संतोष परोचे के घर पहुंचे। वहां उन्होंने कन्या पूजन किया और परिवार के साथ बैठकर भोजन किया। ( Samajik Samrasta )
एक साधारण सी झोपड़ी में बैठकर भोजन करने का यह दृश्य पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया। मंत्री के इस कदम को जहां पंचायत और भेदभावपूर्ण सोच पर “तमाचा” कहा जा रहा है, वहीं सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ हो रही है।
सोशल मीडिया पर सराहना
जैसे ही मंत्री पटेल के भोजन करने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर आए, लोगों ने उन्हें जमकर शेयर करना शुरू कर दिया। लोग इस बात की सराहना कर रहे हैं कि मंत्री ने जातिगत भेदभाव के खिलाफ खड़े होकर समाज को एकजुट करने का काम किया।
कई लोग इसे “समरसता और समानता” की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं। खासकर युवा वर्ग ने फेसबुक और व्हाट्सएप पर पोस्ट शेयर करके इस पहल की तारीफ की। ( Samajik Samrasta )
मंत्री की फेसबुक पोस्ट
मंत्री पटेल ने खुद भी फेसबुक पर अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने लिखा—
“बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्कारों ने मुझे समरसता का भाव आत्मसात करना सिखाया है। समाज में भेदभाव देखकर मुझे तकलीफ हुई, इसलिए मैंने संतोष परोचे जी के घर जाकर भोजन किया। जब हम भेदभाव छोड़कर एक परिवार की तरह जुड़ते हैं, तभी समाज की सबसे बड़ी ताकत प्रकट होती है।”
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उन्होंने आगे लिखा—
“श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने कहा था कि अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति की चिंता सबसे पहले करनी चाहिए। इसी भावना को आत्मसात करते हुए आज मैंने संतोष जी के घर भोजन किया। उनका आत्मीय स्वागत मेरे दिल को छू गया।”
समाज में संदेश
इस घटना ने गांव से लेकर जिले तक और अब पूरे प्रदेश में एक बड़ा संदेश दिया है। जहां पंचायत ने जातिगत भेदभाव को बढ़ावा दिया, वहीं मंत्री पटेल ने समरसता का उदाहरण पेश किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि ऐसे साहसिक फैसले लेते रहेंगे तो धीरे-धीरे समाज में फैली ऊंच-नीच और जातिगत भेदभाव की जड़ें कमजोर होंगी।
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आगे की राह
लोग अब इस पर दो हिस्सों में बंटे नजर आ रहे हैं। एक तरफ वे लोग हैं जो पंचायत के फैसले को सही ठहरा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे लोग हैं जो मंत्री के साथ खड़े होकर सामाजिक समानता की वकालत कर रहे हैं।
हालांकि, इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि समाज में आज भी जातिगत सोच जिंदा है और इसे खत्म करने के लिए साहसी कदमों की जरूरत है।
रायसेन जिले का यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए आईना है। जहां एक ओर जातिगत भेदभाव के कारण लोग बहिष्कार झेल रहे हैं, वहीं मंत्री पटेल जैसे जनप्रतिनिधि समाज को जोड़ने और समरसता लाने की मिसाल बन रहे हैं।
सोशल मीडिया पर जिस तरह इस कदम की सराहना हो रही है, उससे साफ है कि जनता अब ऐसे ही साहसी और संवेदनशील नेताओं को देखना चाहती है।