बस्तर। (Manipur attack martyr) बस्तर जिले के बालेंगा गांव में मातम का माहौल है। गांव का जवान रंजीत कश्यप मणिपुर में उग्रवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया। सोमवार की सुबह जब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ गांव पहुंचा तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, सभी की आंखें आंसुओं से भर आईं।
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गांव में जिस रंजीत के आने पर हंसी-खुशी और ठिठोली का माहौल रहता था, आज उसी रंजीत को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े। (Manipur attack martyr)
घर में पसरा मातम, गांव में सन्नाटा
तीन दिन पहले जब यह खबर आई कि मणिपुर में हुए हमले में बालेंगा के रंजीत शहीद हो गए हैं, तभी से गांव में शोक की लहर दौड़ गई। घर के साथ ही पूरा गांव मातम में डूब गया। पिछले तीन दिनों से परिवार, रिश्तेदार और दोस्त हर वक्त घर पर मौजूद रहे। सबको इंतजार था कि रंजीत का पार्थिव शरीर कब गांव पहुंचेगा। (Manipur attack martyr)
सोमवार की सुबह जैसे ही जगदलपुर एयरपोर्ट से उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। हर किसी के चेहरे पर गम और आंखों में आंसू थे। (Manipur attack martyr)
पत्नी और बेटियों का दर्द
सबसे ज्यादा मार्मिक दृश्य तब सामने आया जब रंजीत की पत्नी और तीनों बेटियां उनके पार्थिव शरीर के पास पहुंचीं। मासूम बच्चियों को अभी तक समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर घर में क्या हो रहा है। वे बस मां के आंचल से चिपकी हुई थीं।
पत्नी कभी पति के चेहरे को देखती, तो कभी अपने बच्चों की तरफ नजर डालती। उनके चेहरे पर यह सवाल साफ झलक रहा था कि अब इन तीनों मासूम बेटियों को वह कैसे समझाएगी कि उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।
बूढ़े मां-बाप का दर्द
रंजीत कश्यप के पिता का गम शब्दों में बयां करना मुश्किल है। वे अपने बेटे के शव को देखते ही रो पड़े। उनके चेहरे पर यह चिंता साफ नजर आ रही थी कि अब उनके बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा। (Manipur attack martyr)
वहीं, मां को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि पिछले रविवार को जिस बेटे को मुस्कुराते हुए ड्यूटी पर विदा किया था, वही बेटा चार दिन बाद तिरंगे में लिपटकर वापस लौटा है।
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नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
जवान की शहादत की खबर सुनते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम संस्कार से पहले बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल और वन मंत्री केदार कश्यप भी बालेंगा पहुंचे। उन्होंने रंजीत कश्यप को श्रद्धांजलि दी और परिवार को ढांढस बंधाया। गांव के हर छोटे-बड़े ने नम आंखों से इस वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। (Manipur attack martyr)
गांव की आंखें नम, सीना गर्व से चौड़ा
गांव के लोग बताते हैं कि रंजीत बेहद मिलनसार और हंसमुख इंसान थे। जब भी वह छुट्टियों में घर आते, तो पूरे गांव का माहौल खुशियों से भर जाता। उनके साथ बिताए पलों को याद कर दोस्त और रिश्तेदार भावुक हो उठे। (Manipur attack martyr)
हालांकि आज हर आंख नम है, लेकिन गांव के लोग गर्व भी कर रहे हैं कि उनका बेटा देश की सेवा करते हुए शहीद हुआ।
अंतिम विदाई का दृश्य
जब रंजीत कश्यप का पार्थिव शरीर गांव के श्मशान घाट की ओर ले जाया गया, तो हर कोई उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए सड़क किनारे खड़ा नजर आया। लोगों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘रंजीत अमर रहे’ के नारों के साथ अपने वीर बेटे को विदा किया।
रंजीत अब भले ही इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी शहादत और बहादुरी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।