लखनऊ के बीकेटी विधानसभा ( BKT youth migration ) क्षेत्र में युवाओं की सबसे बड़ी चिंता रोज़गार है। यहां के ज्यादातर युवा रोज़गार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, पंजाब, आंध्र प्रदेश, गुजरात और यहां तक कि विदेशों तक जाने को मजबूर हैं। नतीजा यह है कि परिवार से दूर रहकर रोज़ी-रोटी कमाने वाले इन युवाओं की गैर मौजूदगी हर चुनाव में वोट प्रतिशत पर भी असर डालती है।
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युवाओं का कहना है कि अगर स्थानीय स्तर पर ही उद्योग-धंधों और कल-कारखानों में रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो उन्हें परदेश जाने की मजबूरी से छुटकारा मिल सकता है। ( BKT youth migration )
युवा चाहते हैं स्थानीय रोजगार
चक बनकट गांव के युवा ऋषि कुमार प्रजापति बताते हैं कि हर युवा अपने परिवार के बीच रहना चाहता है। माता-पिता की देखभाल करना, बच्चों के साथ समय बिताना उसकी प्राथमिकता होती है। लेकिन स्थानीय उद्योगों में रोजगार की व्यवस्था न होने से परदेश जाना मजबूरी बन जाता है। ( BKT youth migration )
इटौंजा क्षेत्र के लासा गांव के उमेश कुमार कहते हैं कि यहां खेती करना बाढ़, सूखा और आपदाओं की वजह से जोखिम भरा है। नकदी फसलों के भुगतान में पूंजीपतियों की लापरवाही और बढ़ती पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए युवाओं को पैसों की आवश्यकता होती है। लेकिन जब कमाई का अवसर गांव में नहीं मिलता, तो पलायन ही एकमात्र विकल्प रह जाता है।
बेरोजगारों की बढ़ती संख्या
कठवारा गांव के आनंद सिंह उर्फ गोलऊ के मुताबिक, बीकेटी विकास खंड की आबादी लाखों में है, जिसमें 20 हजार से अधिक युवा मतदाता हैं। लेकिन सरकारी नौकरियों में सिर्फ तीन हजार युवा ही जगह बना पाए हैं। बाकी या तो परदेश में काम कर रहे हैं या फिर बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। ( BKT youth migration )
युवा रोहित सोनी का कहना है कि आज तक इस क्षेत्र में बेरोजगारी दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसलिए इस बार लोग ऐसे जनप्रतिनिधि की तलाश में हैं जो बेरोजगारी को गंभीरता से मुद्दा बनाए। ( BKT youth migration )
वादे बहुत, हकीकत शून्य
राकेश बताते हैं कि हर चुनाव में युवाओं को रोजगार दिलाने के वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कभी कुछ नहीं हुआ। परिणाम यह है कि शिक्षित हो या अशिक्षित—हर कोई पलायन को मजबूर है। उनका कहना है कि क्षेत्रीय उद्योग-धंधों में स्थानीय युवाओं को ही रोजगार का अवसर मिलना चाहिए। ( BKT youth migration )
अजीत मौर्य ने कहा कि क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक औद्योगिक केंद्र खोले गए थे, जिससे उम्मीद जगी थी कि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। लेकिन वहां भी बाहर से लोगों को लाकर नौकरी दे दी गई, और यहां के बेरोजगार युवा फिर से निराश होकर परदेश जाने को विवश हो गए। ( BKT youth migration )
स्वरोजगार के अवसर भी कम
अखिलेश तिवारी बताते हैं कि सरकारी नौकरियों की कमी के बाद युवाओं को स्वरोजगार का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन यहां स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। ऐसे में परदेश जाकर कमाई करना ही मजबूरी बन जाता है।
क्या है युवाओं की मांग
बीकेटी क्षेत्र के युवाओं की सबसे बड़ी मांग यही है कि यहां के उद्योग-धंधों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देकर रोजगार दिया जाए। अगर सरकार और जनप्रतिनिधि इस दिशा में ठोस कदम उठाते हैं, तो न केवल पलायन रुकेगा बल्कि वोटिंग प्रतिशत भी बढ़ेगा। ( BKT youth migration )
आज के हालात यह साफ संकेत देते हैं कि अगर क्षेत्र में रोजगार की समस्या दूर नहीं हुई तो आने वाले समय में युवा शक्ति का सही उपयोग कभी नहीं हो पाएगा। ( BKT youth migration )
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