लखनऊ। factory distributing disease राजधानी के बीकेटी विकासखंड के अंतर्गत बाबागंज कुम्हरावा रोड पर पहाड़पुर गांव स्थित पुरुषोत्तम राम ग्लूकोज़ फैक्ट्री इन दिनों ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। फैक्ट्री पर एसडीएम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बार-बार नोटिस देने और रोजाना 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के बाद भी प्रबंधन अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहा। हालत यह है कि फैक्ट्री से निकलने वाला केमिकलयुक्त दूषित पानी सीधे खुले में छोड़ा जा रहा है, जिससे आसपास के गांवों का जीवन दूभर हो गया है।
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ग्रामीणों का आरोप: बीमारी बांट रही फैक्ट्री
पहाड़पुर और अतरौरा गांव के लोगों का कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला पानी खेतों और नालों में जाने से भूजल दूषित हो रहा है। इसका सीधा असर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सेहत पर पड़ रहा है। बदबू और दूषित धुएं की वजह से सांस लेने में तकलीफ और पेट संबंधी बीमारियां भी बढ़ रही हैं। factory distributing disease
ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री ने आज तक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक नहीं लगाया। यही वजह है कि केमिकलयुक्त पानी सीधे नालियों और खेतों में जा रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब नोटिस और जुर्माना दोनों का ही असर नहीं हो रहा तो प्रशासन आखिर कब सख्त कदम उठाएगा। factory distributing disease
विधायक भी लिख चुके कई बार पत्र
इस मामले में क्षेत्रीय विधायक योगेश शुक्ला खुद हस्तक्षेप कर चुके हैं। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कई बार पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक सिर्फ कागजी कार्रवाई ही हुई है, ज़मीनी स्तर पर समस्या जस की तस बनी हुई है। factory distributing disease
गौरतलब है कि यह वही फैक्ट्री है जो विधायक योगेश शुक्ला के पैतृक गांव पहाड़पुर में संचालित हो रही है। ऐसे में ग्रामीण इसे शासन-प्रशासन के लिए चुनौती मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि फैक्ट्री का संचालनकर्ता अपने रसूख के दम पर नियमों को ताक पर रखकर प्रदूषण फैला रहा है। factory distributing disease
जुर्माने के बाद भी नहीं सुधरा रवैया
स्वदेश अखबार में खबर छपने के बाद क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्ट्री प्रबंधन को नोटिस जारी किया था। लेकिन कई दिनों तक फैक्ट्री संचालक ने कोई जवाब नहीं दिया। आखिरकार बोर्ड ने रोजाना 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाना शुरू किया। इसके बावजूद न तो जहरीला पानी छोड़ना बंद हुआ और न ही वायु प्रदूषण पर रोक लगी। factory distributing disease
ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री खुलेआम प्रशासन और कानून को चुनौती दे रही है। प्रदूषण का असर सिर्फ पर्यावरण पर ही नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी पर भी सीधा पड़ रहा है। factory distributing disease
ग्रामीणों की मांग: फैक्ट्री हो बंद
पहाड़पुर और आसपास के गांवों के लोग अब इस फैक्ट्री को बंद कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अगर जल्द ही फैक्ट्री का अपशिष्ट जल डिस्चार्ज जीरो नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। factory distributing disease
क्या बोले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी
इस मामले पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्य ने कहा –
“पहले चेतावनी नोटिस और जुर्माने के बाद भी अगर फैक्ट्री संचालक ने दूषित जल का डिस्चार्ज बंद नहीं किया तो इस बार जांच में दोषी पाए जाने पर फैक्ट्री को बंद कराने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।”
आखिर कब मिलेगा समाधान?
ग्रामीणों की जिंदगी पर खतरा मंडरा रहा है और प्रशासन की कार्रवाई अब तक कागजों तक ही सीमित दिख रही है। सवाल यह है कि रोजाना 15 हजार रुपये का जुर्माना भी अगर किसी फैक्ट्री मालिक को रोक नहीं पा रहा तो आखिर कब तक ग्रामीण जहरीली हवा और पानी के बीच जिंदगी गुजारते रहेंगे? factory distributing disease
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