बलरामपुर-रामानुजगंज। suspicious death of villager जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम रेवतीपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। कोरवा जनजाति के 50 वर्षीय ग्रामीण बिफन कोरवा पिता रामधनी कोरवा की अचानक मौत हो गई। उनकी मौत के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया है और ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग पर फूट पड़ा है।
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(Balrampur-Ramanujganj: A shocking incident occurred in Revatipur village of Ramchandrapur block. Bifan Korwa, a 50-year-old member of the Korwa tribal community and son of Ramdhani Korwa, suddenly passed away. His death has cast a pall of grief over the entire village, and the villagers’ anger has erupted against the Forest Department.) suspicious death of villager
ग्रामीणों और परिजनों का साफ आरोप है कि वन विभाग की दबंगई और घर खाली कराने की जबरन कार्रवाई ने बिफन की जान ले ली।
पांच दिनों से चल रहा था दबाव, टूट गया हौसला
परिजनों ने बताया कि बीते पांच दिनों से वन विभाग की टीम लगातार गांव में पहुंचकर ग्रामीणों पर दबाव बना रही थी। उनसे जबरन घर खाली करने और जप्तीनामा पर हस्ताक्षर कराने की कोशिश की जा रही थी। इतना ही नहीं, अफसरों और कर्मचारियों ने घर तोड़ने की धमकी तक दे डाली। suspicious death of villager
इन हालातों से बिफन कोरवा मानसिक तनाव में आ गए। उन्होंने कई दिनों से ठीक से भोजन करना भी छोड़ दिया था। रविवार को उन्होंने केवल पानी पिया और जैसे ही घर से बाहर निकले, अचानक गिर पड़े। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। suspicious death of villager
ग्रामीणों का आरोप – “वन विभाग की धमकियों ने छीन ली जान”
गांव वालों का कहना है कि यह मौत प्राकृतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक दबाव की वजह से हुई है। लोगों का आरोप है –
“गरीब और असहाय जनजातीय परिवारों को डरा-धमकाकर घर से बेघर करने की साजिश रची जा रही है। बिफन कोरवा इसी डर और दबाव से टूट गए और उनकी जान चली गई।” suspicious death of villager
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग जंगल की रक्षा के नाम पर गरीबों को परेशान कर रहा है, जबकि बड़े स्तर पर होने वाली अवैध कटाई और जंगल की लूट पर चुप्पी साधे बैठा है। suspicious death of villager
शव के साथ सड़क पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी suspicious death of villager
सोमवार सुबह बिफन कोरवा के शव के साथ ग्रामीणों और परिजनों ने रामचंद्रपुर–सनावल मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। तीन घंटे तक सड़क पूरी तरह जाम रही। इस दौरान लोग वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे।
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जाम की वजह से आम लोगों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ी। बाजार जाने वाले, स्कूली बच्चे और वाहन चालक सड़क पर फंसे रहे।
मौके पर पहुंचे अधिकारी, दिया जांच का भरोसा
सूचना मिलते ही एसडीओपी बाजीलाल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाइश दी और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि मामले की पूरी जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ही ग्रामीणों ने चक्का जाम खत्म किया।
पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए 100 बिस्तर अस्पताल, रामानुजगंज भेज दिया है। हालांकि, ग्रामीणों में अब भी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि कई बार इस तरह की घटनाएं केवल कागजों तक ही सिमट जाती हैं। उन्हें डर है कि इस बार भी मामला दबा दिया जाएगा। https://dainikhistory.com/
वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग गरीबों और जनजातीय परिवारों पर अत्याचार कर रहा है, जबकि असली अपराधियों और अवैध लकड़ी माफियाओं पर कोई कार्रवाई नहीं करता।
अब सबकी नजर प्रशासन पर है कि क्या इस मामले की ईमानदारी से जांच होगी या फिर यह भी कागजी कार्यवाही में दब जाएगा।