बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। भर्ती प्रक्रिया में चार महिलाओं ने फर्जी अंकसूची का इस्तेमाल कर नियुक्ति हासिल कर ली थी। शिकायत और जांच के बाद अब इन चारों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
शिकायत से खुला मामला
यह मामला तब सामने आया जब ग्राम जारगीम निवासी गायत्री पति हेमंत कुमार ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत कलेक्टर से की। शिकायत के बाद कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए।
जिला शिक्षा अधिकारी और एसडीओ राजस्व शंकरगढ़ की देखरेख में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। इस टीम ने कई आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए प्राप्त आवेदनों और दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की।
जांच में सामने आया सच
जांच दल ने पाया कि भर्ती प्रक्रिया में शामिल चार महिलाओं ने अपने शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी बनाए थे।
अस्माना (ग्राम जारगीम)
रीजवाना (ग्राम महुआडीह)
प्रियंका यादव (ग्राम कोठली)
सुशीला सिंह (ग्राम बेलकोना)
इन सभी ने अजीजी पब्लिक स्कूल, भगवतपुर/कुसमी की फर्जी 8वीं कक्षा की अंकसूचियां प्रस्तुत की थीं। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनकी नियुक्ति की गई थी।
संगठित षड्यंत्र की पुष्टि
20 अगस्त 2025 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि यह सिर्फ दस्तावेज़ों में गड़बड़ी नहीं बल्कि एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र है। जांच समिति ने माना कि इन महिलाओं ने जानबूझकर कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग किया और शासन को गुमराह कर आंगनबाड़ी सहायिका की नौकरी हासिल की।
एफआईआर दर्ज, भर्ती प्रक्रिया पर सवाल
कलेक्टर के निर्देश पर प्रभारी परियोजना अधिकारी बबली यादव ने थाना शंकरगढ़ में चारों महिलाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। अब पुलिस इस मामले की तहकीकात कर रही है कि इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
इस कार्रवाई से न केवल चारों आरोपित महिलाएं मुश्किल में आ गई हैं बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में फर्जीवाड़ा होना गंभीर मामला है क्योंकि इससे जरूरतमंद योग्य उम्मीदवारों का हक छीना गया है।
क्षेत्र में चर्चा का विषय
एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही शंकरगढ़ क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस बात पर नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं कि सरकारी नौकरियों में धांधली आम हो गई है। कई ग्रामीणों का कहना है कि अब जिला प्रशासन को चाहिए कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की दोबारा जांच की जाए और दोषियों को कड़ी सजा मिले।
प्रशासन की सख्ती
प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि इस तरह के फर्जीवाड़े किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर किसी और ने भी फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर नौकरी हासिल की होगी, तो उनके खिलाफ भी यही कार्रवाई होगी।