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बस्तर संवाद 2025: इतिहास, संस्कृति और बदलाव पर चर्चा, बस्तर में नई विकास की बयार Emphasis on history, culture and change

छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के तहत बस्तर संवाद का आयोजन, जिसमें इतिहास, संस्कृति और बदलाव पर चर्चा हुई। विधायक किरण देव, महापौर संजय पांडे और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और विकास के नए आयाम स्थापित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में युवाओं, छात्रों और स्थानीय नागरिकों ने भी सक्रिय भागीदारी की।

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जगदलपुर, छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 साल पूरे होने के मौके पर रजत महोत्सव के अंतर्गत बस्तर संवाद का आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम लालबाग स्थित शौर्य भवन में शनिवार को आयोजित किया गया, जिसमें बस्तर की इतिहास, संस्कृति और बदलते परिदृश्य में विकास पर गहन चर्चा हुई।

इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जगदलपुर विधायक किरण देव, महापौर संजय पांडे, नगर पालिका के सभापति खेमसिंह देवांगन, आईजी बस्तर सुंदरराज पी, कलेक्टर हरिस एस, सीईओ जिला पंचायत प्रतीक जैन, विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापक, साहित्यकार, कलाकार और पर्यटन विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

बस्तर की संस्कृति और विकास पर विधायक की बात

मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित करते हुए विधायक किरण देव ने कहा कि बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, खनिज संसाधन और वनोपज के लिए दुनिया में अनूठा है। उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों में बस्तर ने शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना और सुरक्षा के क्षेत्र में काफी तरक्की की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में बस्तर में अब माओवादी समस्या धीरे-धीरे समाप्त हो रही है। उनका कहना था कि जल्द ही बस्तर शांति और खुशहाली की नई दिशा में अग्रसर होगा।

विधायक ने बस्तर की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, बस्तर में हर 20 किलोमीटर के अंतर पर परिधान और भाषा बदल जाती है। यह क्षेत्र सांस्कृतिक समृद्धि का अद्भुत उदाहरण है।

युवावस्था के अनुभव और नक्सल समस्या पर अनुभव

विधायक ने अपने युवावस्था के अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक समय वे रात के दो बजे मोटरसाइकिल से बीजापुर यात्रा कर चुके हैं। उस समय माओवादी गतिविधियों की वजह से रात्रिकालीन यात्राओं पर रोक लग गई थी। अब, नक्सल गतिविधियां घटने के कारण बस्तर में शांति स्थापित हो रही है।

उन्होंने कहा कि बस्तर का प्राकृतिक सौंदर्य इतना अद्भुत है कि इसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। रामायण में दंडकारण्य के रूप में उल्लिखित यह भूमि आज भी अपनी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि यूनेस्को के सर्वेक्षण में बस्तर का धुड़मारास गांव दुनिया के 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में शामिल किया गया है।

बस्तर के विकास की नई दिशा

विधायक ने कहा कि अब गांव-गांव में बिजली, सड़क और संचार सुविधा पहुंच रही है। इससे जनजागरूकता बढ़ी है और बस्तर के लोग विकास की नई दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उनका यह भी कहना था कि भविष्य में बस्तर में बदलाव की नई बयार बहने वाली है।

महापौर और पुलिस महानिरीक्षक की टिप्पणियाँ

महापौर संजय पांडे ने बस्तर के पौराणिक इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह क्षेत्र रामायण और महाभारत में उल्लिखित है। इसलिए, बस्तर ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बस्तर में माओवादी गतिविधियों की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब नक्सली कमजोर पड़ रहे हैं और सरकार के सकारात्मक कदमों से जल्द ही इस समस्या का समूल नाश होगा।

उन्होंने सुरक्षा जवानों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि पहले पुलिस और जवानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन अब मनबल और रणनीति के दम पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

सांस्कृतिक संरक्षण और युवाओं की भूमिका

परिचर्चा में बस्तर विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक अप्रतिम झा ने ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया और युवाओं को आगे आने की अपील की।

भरत गंगादित्य ने लोकगीतों के महत्व को बताया, हितप्रिता ठाकुर ने हल्बी भाषा और नीलूराम कोर्राम ने गोंडी भाषा के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

ब्लॉगर उपेन्द्र ठाकुर ने अपने ब्लॉग के माध्यम से बस्तर के पर्यटक स्थल, संस्कृति और व्यंजन का प्रचार करने की बात कही। वहीं, स्थानीय फिल्मकार अविनाश प्रसाद ने बताया कि बस्तर में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी बदलाव आया है।

अमित भाटिया, सीईओ जनपद पंचायत, ने हाट-बाजार और बस्तर के व्यंजनों की जानकारी साझा की। इस दौरान सभी वक्ताओं ने युवाओं और नागरिकों के सवालों का समाधान भी किया।

बस्तर संवाद का महत्व

इस परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर और विकास को एक साथ जोड़ना था। कार्यक्रम में उपस्थित छात्र, अधिकारी, नागरिक और विशेषज्ञों ने मिलकर बस्तर के इतिहास, संस्कृति और बदलाव के हर पहलू पर चर्चा की।

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि सांस्कृतिक संरक्षण और विकास दोनों ही साथ-साथ चल सकते हैं। स्थानीय कला, भाषा, परंपरा और पर्यटन को बढ़ावा देते हुए बस्तर को विकास और समृद्धि की नई दिशा में ले जाना संभव है।

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