बरसाना, गोवर्धन, नंद गांव और कोसी समेत आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों ऑटो चालक हाल ही में अपने गंभीर समस्याओं के साथ मंत्री प्रतिनिधि नरदेव चौधरी के पास पहुंचे। उनका कहना है कि थाना बरसाना के इंचार्ज विनोद बाबू मिश्रा और उनके अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा उन्हें लगातार चौथ वसूली और अन्य अत्याचारों का सामना करना पड़ रहा है।
फरियादियों का आरोप है कि ठेकेदार उनसे रोजाना ₹20 की रसीद काटते हैं। इसके अलावा, कई बार उनके ऑटो को पुलिस बेगार के लिए ले जाती है, बावजूद इसके चालक मारपीट का शिकार होते रहते हैं। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां ऑटो चालक पुलिस की मार से अस्पताल तक पहुंच चुके हैं।
ऑटो चालकों का कहना है कि यदि वे अधिकारियों के अत्याचार का विरोध करते हैं तो उन्हें भारी चालान भरने को मजबूर किया जाता है। गरीब और मेहनती ऑटो चालक इन सब परेशानियों के बीच अपने परिवार का पेट भरने की जद्दोजहद में लगे रहते हैं।
एक ऑटो चालक ने बताया,
“हमारे पास सभी गाड़ियों के कागज पूरे हैं, लेकिन फिर भी इंस्पेक्टर और सिपाही हम पर तरह-तरह के अत्याचार करते रहते हैं। हमें नहीं पता कि यह आतंक और अन्याय कब खत्म होगा।”
चालकों ने मंत्री प्रतिनिधि नरदेव चौधरी से शिकायत की और कहा कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई और न्याय नहीं मिला, तो क्षेत्र के सभी ऑटो चालक हड़ताल पर चले जाएंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस हड़ताल से शहर और आसपास के इलाकों में परिवहन पर असर पड़ेगा।
मंत्री प्रतिनिधि नरदेव चौधरी ने ऑटो चालकों की समस्या को गंभीरता से लिया और अधिकारियों के खिलाफ जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक के साथ अनावश्यक अत्याचार और वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बरसाना और आसपास के इलाकों में ऑटो चालक रोजाना लोगों को घर-घर और बाजार तक पहुँचाने का काम करते हैं। उनके बिना स्थानीय परिवहन व्यवस्था अस्थिर और प्रभावित हो सकती है। ऐसे में चालकों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुलझाना प्रशासन के लिए भी ज़रूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस और प्रशासन के अत्याचारों के खिलाफ यदि लोग खुलकर आवाज़ उठाएं और अधिकारियों तक अपनी बात पहुँचाएं, तो ही ऐसे मामलों में सुधार संभव है। ऑटो चालकों की इस समस्या को नजरअंदाज करना न केवल उनके जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि जनता की आवाजाही और स्थानीय व्यापार पर भी असर डालता है।