कांकेर। परंपराओं और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के लिए बच्चों की छोटी-छोटी पहल अक्सर समाज के लिए बड़ी मिसाल बन जाती है। कांकेर जिले के सरस्वती शिशु मंदिर सुरही स्कूल में पोला तिहार के अवसर पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब यहां पढ़ने वाले भैया-बहनों ने मिट्टी से खूबसूरत मूर्तियां और खिलौने बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया।
विद्यालय में हुए इस आयोजन में बच्चों ने न केवल मिट्टी के बैल, बर्तन और खिलौने बनाए, बल्कि देवी-देवताओं की आकर्षक मूर्तियों को भी आकार दिया। इन मूर्तियों और खिलौनों की पूजा-अर्चना कर परंपरागत तरीके से पोला तिहार मनाया गया।
बच्चों की प्रतिभा आई सामने
सरस्वती शिशु मंदिर सुरही के छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई के साथ-साथ अपनी कला को भी उजागर किया। कक्षा अरुण से लेकर सप्तम तक के बच्चों ने इस गतिविधि में हिस्सा लिया।
तेजस्वी शोरी (पंचम कक्षा)
दीपांशी मरकाम (षष्ठ कक्षा)
चिंकी मरकाम (सप्तम कक्षा)
दीपक साहू और नमन मरकाम
इन बच्चों ने मिट्टी से दुर्गा माता, श्री गणपति, कृष्ण भगवान की मूर्तियां, नादिया बैल, बर्तन और कई तरह के खिलौने तैयार किए। उनकी बनाई आकृतियों ने सभी का मन मोह लिया।
आचार्य-दीदी की देखरेख में सजी रचनात्मकता
पूरे आयोजन में विद्यालय के प्रधानाचार्य तिहारूराम मरकाम और आचार्य-दीदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी देखरेख में बच्चों ने न सिर्फ मिट्टी को आकार देना सीखा, बल्कि उसमें रंग भरकर उसे और भी आकर्षक बना दिया। इस पहल से यह साफ झलकता है कि विद्यालय बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी रचनात्मकता को भी प्रोत्साहित कर रहा है।
आचार्य-दीदी ने बच्चों को संदेश दिया कि उन्हें अपना समय टीवी और मोबाइल पर व्यर्थ नहीं करना चाहिए। खाली समय का सदुपयोग कर पढ़ाई के साथ-साथ हॉबी और हुनर को आगे बढ़ाना चाहिए।
संस्कृति और परंपरा से जुड़ाव
पोला तिहार छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश का पारंपरिक पर्व है, जिसमें किसान अपने बैल की पूजा करते हैं। इस त्योहार के मौके पर मिट्टी की मूर्तियों और खिलौनों का निर्माण बच्चों को न केवल उनकी परंपरा से जोड़ता है, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति को करीब से समझने का अवसर भी देता है।
स्कूल स्टाफ का कहना है कि बच्चों को बचपन से मिट्टी से खेलने और कुछ नया बनाने की आदत डालना उनकी रचनात्मकता को बढ़ावा देता है। यह पहल बच्चों को आधुनिकता के साथ-साथ अपनी जड़ों से भी जोड़े रखने का काम कर रही है।
प्रधानाचार्य का संदेश
विद्यालय प्रभारी तिहारूराम मरकाम ने कहा कि बच्चे जब अपने खाली समय का सही उपयोग करते हैं, तो उनकी प्रतिभा और भी निखरती है। मिट्टी से खिलौने और मूर्तियां बनाना बच्चों को धैर्य, मेहनत और कला का महत्व सिखाता है।
उत्साह से भरा माहौल
पूरे आयोजन में विद्यालय के स्टाफ और सभी विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मौके पर उमेश मांडवी, पवन नेताम, लीना देहारी, रामभरोस कोड़ोपी, अनिता मरकाम, छबिलाल कुंजाम, रेखा नेताम, लोकेश्वरी कुंजाम, टेश्वर निषाद समेत पूरे स्कूल परिवार की मौजूदगी रही।
कांकेर जिले के सरस्वती शिशु मंदिर सुरही में पोला तिहार के अवसर पर बच्चों ने मिट्टी से बैल, बर्तन और देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया। प्रधानाचार्य और आचार्य-दीदी की देखरेख में बने इन खिलौनों ने परंपरा और रचनात्मकता का सुंदर संगम पेश किया।