जगदलपुर। बस्तर में आयोजित वन महोत्सव के दौरान एक किसान ने ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक संदेश दिया। ग्राम पीपलवांड निवासी सोन सिंह (48 वर्ष) ने वनमंत्री केदार कश्यप के आग्रह पर अपनी वर्षों से कब्जाई गई वनभूमि को स्वेच्छा से छोड़ दिया। किसान का यह निर्णय न केवल अनुकरणीय है, बल्कि समाज में नई सोच और जागरूकता का प्रतीक भी बन गया।
कार्यक्रम में हुआ सम्मान
बेसोली में हुए इस कार्यक्रम के दौरान वनमंत्री केदार कश्यप ने किसान से अपील की थी कि वह वनभूमि का कब्जा छोड़कर समाज के लिए एक मिसाल पेश करें। सोन सिंह ने मंत्री की बात मानते हुए गांववासियों के सामने लिखित में अपनी कब्जाई जमीन वापस कर दी और भविष्य में ऐसा न करने की शपथ भी ली।
इस मौके पर मंत्री केदार कश्यप ने कहा – “यह कदम बाकी लोगों के लिए प्रेरणा बनेगा। सोन सिंह ने जो उदाहरण पेश किया है, उससे अन्य लोग भी प्रभावित होकर स्वेच्छा से वनभूमि खाली करेंगे।”
गांव और प्रशासन ने किया स्वागत
गांव के सरपंच केशव और ग्रामीणों ने सोन सिंह के इस निर्णय का जोरदार स्वागत किया। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों ने भी इस पहल की सराहना की। कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक आर.सी. दुग्गा और वन मंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा है, जिसका नतीजा है कि अब लोग खुद आगे आकर कब्जाई जमीन छोड़ रहे हैं।
उपवनमंडलाधिकारी आई.पी. बंजारे और भानपुरी वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. प्रीतेश कुमार पांडे ने भी सोन सिंह को शुभकामनाएं दीं और अन्य कब्जाधारियों से अपील की कि वे भी स्वेच्छा से वनभूमि वापस कर दें।
विकास कार्यों का वादा
वन विभाग ने आश्वासन दिया कि गांव में विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा। ग्राम सभा के प्रस्ताव पर विभाग ने दो तालाब और 125 एकड़ क्षेत्र की फेंसिंग करने का काम जल्द शुरू करने का भरोसा दिया है। इसके अलावा क्षेत्र में मिश्रित वृक्षारोपण भी किया जाएगा ताकि स्थानीय लोगों की आजीविका और रोजगार के अवसर बढ़ सकें।
समाज के लिए बड़ी सीख
किसान सोन सिंह का यह कदम गांव और समाज के लिए एक मिसाल बन गया है। जहां आजकल अक्सर जमीन और कब्जे को लेकर विवाद सामने आते हैं, वहीं सोन सिंह ने यह साबित कर दिया कि समाजहित और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठना जरूरी है।
वनमंत्री केदार कश्यप ने इसे “बस्तर के लिए एक ऐतिहासिक पहल” बताते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में और भी लोग इस प्रेरणा से प्रभावित होकर वनभूमि का अतिक्रमण छोड़ेंगे।