गोवर्धन। गाँवों में पानी निकासी की समस्या से परेशान किसानों का सब्र आखिरकार टूट गया। शुक्रवार को सैकड़ों किसानों ने अचानक गोवर्धन तहसील पहुंचकर घेराव कर लिया। हाथों में तख्तियां और झंडे लिए किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूरा तहसील परिसर “हक की लड़ाई” के नारों से गूंज उठा।
खेतों से घरों तक पहुंचा पानी, कई मकान गिरे
किसानों और समाजसेवियों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि बारिश के बाद खेतों और रास्तों में भरे पानी की निकासी न होने से हालात बिगड़ गए हैं। गांव के कई घरों तक पानी पहुंच चुका है। पानी से घरों की दीवारों में दरारें पड़ रही हैं और दो मकान ढह भी चुके हैं। किसानों ने बताया कि यह सिर्फ खेती का नुकसान नहीं है बल्कि अब उनके परिवार भी खतरे में आ गए हैं।
प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप
प्रदर्शनकारी किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले वे अपनी समस्या लेकर गोवर्धन तहसील और जिला प्रशासन से मिले थे। उस समय अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि तीन दिन में पानी की निकासी कर दी जाएगी और जो नुकसान हुआ है उसका मुआवजा भी मिलेगा। लेकिन, किसानों का कहना है कि आश्वासन सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया। अधिकारियों की ओर से केवल औपचारिकता निभाई गई, जबकि जमीनी स्तर पर कोई समाधान नहीं हुआ।
भूखे-प्यासे धरने पर बैठे किसान
शुक्रवार को जब किसान तहसील पहुंचे तो वहां जिला अधिकारी मौजूद नहीं थीं। किसानों ने साफ कहा कि जब तक अधिकारी नहीं आएंगे, वे तहसील परिसर में ही भूखे-प्यासे धरने पर बैठे रहेंगे। किसानों का कहना है कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे। अगर यहां उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे सीधे डीएम ऑफिस और लखनऊ तक जाएंगे।
महिला किसान नेता की चेतावनी
महिला किसान नेता विनोदी देवी ने चेतावनी दी कि अगर तहसील स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी गई तो किसान सड़क पर उतरकर विधानसभा तक का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा – “अब हम और चुप नहीं बैठेंगे। हमारे खेत-खलिहान डूब गए हैं, घर उजड़ गए हैं, अगर न्याय नहीं मिला तो प्रदेश व्यापी आंदोलन होगा।”
किसानों का दर्द और गुस्सा
एडवोकेट अंजलि सैनी ने भी प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को बार-बार अनदेखा करना प्रशासन के लिए भारी पड़ सकता है। किसानों ने बताया कि हर साल बारिश में यही समस्या दोहराई जाती है लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ वादे किए जाते हैं। इस बार वे अपनी हक की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेंगे।
प्रदेश व्यापी आंदोलन की तैयारी
धरने पर बैठे किसानों ने कहा कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे प्रदेश व्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि जब तक खेतों और घरों से पानी नहीं निकाला जाएगा और हुए नुकसान का मुआवजा नहीं दिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।