बालोद | ग्राम मोहारा के गायत्री प्रज्ञा पीठ में आयोजित 40 दिवसीय सामूहिक अनुष्ठान का भव्य समापन हुआ। यह आयोजन अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में और परम वंदनीय माता के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर संपन्न हुआ। इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के सदस्य, ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए।
18 साधकों ने की साधना, प्रतिदिन 33 माला जप
इस कार्यक्रम की खासियत यह रही कि 18 साधक लगातार 40 दिनों तक साधना में लीन रहे। सभी साधकों ने रोजाना 33 माला गायत्री मंत्र का जप किया और प्रतिदिन यज्ञ में आहुति समर्पित की।
आयोजकों के अनुसार, इस अनुष्ठान से पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मक माहौल और धार्मिक जागरूकता का संचार हुआ।
5 कुंडीय महायज्ञ में ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी
समापन अवसर पर आयोजित 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर अपने घर, परिवार और समाज की सुख-शांति व समृद्धि की कामना की।
महायज्ञ के संचालन का दायित्व भूषण लाल सार्वा और संतोष कुमार साहू ने निभाया।
मुख्य यजमान और विशिष्ट अतिथि
कार्यक्रम में मुख्य यजमान के रूप में डॉ. डी.एल. गंजीर, उषा गंजीर, गोपाल साहू, अनसूया साहू, डॉ. हरि कृष्ण गंजीर, रुकमती गंजीर, चंपेश्वर साहू, यमुना साहू, शालिक राम और तोरण साहू सहित कई परिजन शामिल रहे।
इसके अलावा इस आयोजन में विशेष रूप से उपस्थित रहे:
धनसिंह गंजीर – संयोजक, गायत्री शक्तिपीठ गुरुर, हरीराम साहू – संयोजक, हीरक मंडल घोघोपुरी, यशवंत गंजीर – संयोजक, हीरक मंडल मोहारा, बुद्धदेव साहू – मुड़पार
डॉ. गोपाल साहू ने जताया आभार
समापन समारोह में बोलते हुए डॉ. गोपाल साहू ने सभी साधकों, श्रद्धालुओं और आयोजन में सहयोग देने वालों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा:
“इस तरह के अनुष्ठान समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि समाज में एकता और आध्यात्मिक जागरूकता का भी संदेश देता है।”
पूरे गांव का मिला सहयोग
इस आयोजन को सफल बनाने में गायत्री परिवार मोहारा और ग्रामीणों का बड़ा योगदान रहा। कार्यक्रम के सफल संचालन में सूखीत राम नायक, दानवीर नायक, मीराबाई, वरुण साहू, संतोष साहू, सविता साहू, जंगलुराम, मुरही बाई, फूलबाई, सोनिया बाई सहित कई लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आध्यात्मिक जागरण की मिसाल
40 दिनों तक चले इस अनुष्ठान ने न केवल साधकों के जीवन में बल्कि पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरण की एक नई ऊर्जा भर दी।
गायत्री मंत्र जप और यज्ञ से जहां पर्यावरण की शुद्धि हुई, वहीं ग्रामीणों में धार्मिक एकजुटता की भावना भी मजबूत हुई।