फरसगांव। छत्तीसगढ़ शासन के आदेश पर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पूरे प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए “पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के तहत तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में फरसगांव ब्लॉक के सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण 18 अगस्त से 20 अगस्त तक सामुदायिक भवन फरसगांव में आयोजित किया गया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण, शिक्षा, स्वच्छता और बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना था। प्रशिक्षण समाप्ति पर सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए।
बच्चों की सेहत और पोषण पर विशेष जोर
परियोजना अधिकारी श्रीमती सुनीता शर्मा ने बताया कि इस प्रशिक्षण के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को गंभीर रूप से कुपोषित (SAM), मध्यम कुपोषित (MAM) और बच्चों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से निपटने के तरीकों की जानकारी दी गई।
श्रीमती शर्मा ने कहा,
“पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य बच्चों में संतुलित आहार, फलों-सब्जियों के अधिक सेवन और स्वस्थ आदतों के विकास को बढ़ावा देना है।
प्रशिक्षण के दौरान बच्चों के खानपान में पोषण बढ़ाने, स्वच्छता बनाए रखने और माता-पिता को बच्चों की देखभाल में शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
ईसीसीई पर आधारित प्रशिक्षण सेशन
विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसाइटी के जिला समन्वयक योगेंद्र जैन ने बताया कि प्रशिक्षण में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ECCE) पर केंद्रित प्रशिक्षण दिया गया। इसमें खासतौर पर दो राष्ट्रीय रूपरेखाओं पर चर्चा हुई:
- “नवचेतना” (2024) – जन्म से तीन वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रारंभिक बचपन प्रोत्साहन की रूपरेखा
- “आधारशिला” (2024) – तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा का राष्ट्रीय पाठ्यक्रम
योगेंद्र जैन ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में खेल-आधारित गतिविधियों पर जोर दिया गया है। बच्चों के लिए साप्ताहिक खेल आधारित कैलेंडर बनाने की सलाह दी गई ताकि पढ़ाई रोचक और आनंददायक बने।
कुपोषण के प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान कार्यकर्ताओं को बताया गया कि 0-6 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण की पहचान कैसे की जाए और उसे प्रबंधित करने के क्या उपाय हैं। इसमें शामिल थे:
गंभीर व मध्यम कुपोषण की पहचान के तरीके
बच्चों के संतुलित आहार दिशानिर्देश
सूक्ष्म पोषण की कमी से निपटने के कारगर तरीके
व्यक्तिगत स्वच्छता और साफ-सफाई के मानक
बच्चों के विकास की निरंतर निगरानी के तरीके
अधिकारियों की मौजूदगी और सहभागिता
प्रशिक्षण कार्यक्रम में परियोजना अधिकारी सुनीता शर्मा, प्रभारी अधिकारी गोदावरी कोर्राम, जिला समन्वयक योगेंद्र जैन, पर्यवेक्षक कृष्णा जोशी, सावित्री ठाकुर, सरिता मरकाम, विजय दुग्गा, नरेंद्र बघेल, कामिनी पांडे, जगलाल पांडे सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा कोंडागांव से आए विशेष अधिकारियों ने भी इस प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाई।
समुदाय की भूमिका पर भी दिया गया जोर
इस कार्यक्रम के तहत यह संदेश दिया गया कि केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि माता-पिता, समुदाय और शिक्षक भी बच्चों की पोषण संबंधी आदतों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों की बेहतर सेहत और शिक्षा के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।