बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति सेवारी पर भ्रष्टाचार और किसानों के शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं। किसानों का कहना है कि समिति लंबे समय से अनियमितताओं का गढ़ बनी हुई है। इससे परेशान होकर 15 ग्राम पंचायतों के किसानों ने सामूहिक रूप से जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज की और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रबंधक की फर्जी नियुक्ति और भाई-भतीजावाद
शिकायत में किसानों ने आरोप लगाया है कि समिति के प्रबंधक मुकुंद राम की नियुक्ति फर्जी तरीके से की गई। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने रिश्तेदारों को भी समिति में नौकरी पर रख लिया है। किसानों का कहना है कि समिति किसानों की मदद करने के बजाय रिश्तेदारों और परिचितों का केंद्र बन गई है।
धान खरीदी और खाद वितरण में अनियमितता
किसानों ने कहा कि समिति में धान खरीदी टोकन और खाद वितरण के नाम पर किसानों से अवैध वसूली की जाती है। साथ ही, किसानों को मिलने वाले सिलाई, तौलाई और ढुलाई शुल्क की राशि भी हड़प ली जाती है। आरोप यह भी है कि समिति प्रबंधन खाद को बाहर के व्यापारियों को बेच देता है, जिससे असली किसानों को खाद के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।
अमर्यादित गतिविधियों और फर्जी ऋण का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि समिति परिसर में रात को शराब और मांस पार्टी जैसी अमर्यादित गतिविधियाँ होती हैं। इसके अलावा, किसानों के नाम पर फर्जी ऋण स्वीकृत कर उनकी वसूली की जाती है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वे इसका विरोध करते हैं, तो उन्हें धमकियाँ देकर चुप कराया जाता है।
किसानों की मुख्य मांगें
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में किसानों ने कई अहम मांगें रखी हैं –
धान खरीदी केंद्र को सेवारी समिति से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए।
सभी आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।
समिति की व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।
किसानों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
ग्रामीणों में गुस्सा बढ़ता जा रहा
ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी योजनाओं और सहकारी समितियों का उद्देश्य किसानों की मदद करना है, लेकिन सेवारी समिति में किसान ही सबसे ज्यादा ठगे जा रहे हैं। लोगों का मानना है कि यह मामला सिर्फ किसानों का नहीं, बल्कि पूरे सहकारी तंत्र पर सवाल खड़े करता है।