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Balod राष्ट्रीय एकता में शिक्षिका पुष्पलता साहू का सराहनीय योगदान cgnews

बालोद जिले की शिक्षिका पुष्पलता साहू ने बच्चों के सपनों को हकीकत में बदलते हुए राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का अनोखा संदेश दिया। उन्होंने खुद के प्रयास और खर्च से बच्चों को सांस्कृतिक मंच दिलाया, तिरंगा रैली प्रतियोगिता आयोजित कराई और विजेताओं को पुरस्कृत किया। उनकी पहल गांव और समाज के लिए प्रेरणादायी बनी।

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बालोद। गांव के छोटे-छोटे बच्चों के सपनों को साकार करने का जज़्बा अगर किसी ने दिखाया है, तो वह हैं शासकीय प्राथमिक शाला बरहीपारा (बालोद) की शिक्षिका श्रीमती पुष्पलता साहू। बच्चों में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना जगाने के लिए उन्होंने जो प्रयास किए, वह वाकई मिसाल बन गए।

बरहीपारा जैसे छोटे से गांव में बच्चे हमेशा यह सपना देखते थे कि वे भी रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर मंच पर अपनी कला और संस्कृति प्रस्तुत करें। बच्चों का यह सपना पूरा करने का जिम्मा शिक्षिका पुष्पलता साहू ने उठाया और अपने स्तर पर ऐसा माहौल बनाया, जहां हर बच्चा खुलकर अपनी प्रतिभा दिखा सके।

बच्चों के सपनों को मिला पंख

शिक्षिका ने ग्राम पंचायत बरही की सरपंच ममता सिन्हा से मिलकर कार्यक्रम के लिए माइक, बॉक्स, शामियाना और कारपेट की व्यवस्था कराई। वहीं बच्चों के लिए श्रृंगार सामग्री और साड़ी की व्यवस्था उन्होंने खुद की। इतना ही नहीं, बच्चों के उत्साह को बढ़ाने के लिए उन्होंने खुद के खर्च से “हर घर तिरंगा रैली प्रतियोगिता” में प्रथम और द्वितीय आने वाले बच्चों को कंपास सेट और कॉपी भेंट की।

इसके साथ ही जिन बच्चों ने पहाड़ा सुनाकर अपनी प्रतिभा दिखाई, उन्हें भी कंपास सेट दिया गया। इस पहल से न केवल बच्चों का मनोबल बढ़ा बल्कि गांव में शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल भी बना।

स्वतंत्रता दिवस पर विशेष योगदान

स्वतंत्रता दिवस की तैयारी के दौरान गांव की महिलाओं ने शाला प्रांगण की साफ-सफाई और क्यारी निर्माण में श्रमदान दिया था। उनके इस योगदान को सम्मानित करने के लिए शिक्षिका पुष्पलता साहू ने महिलाओं को श्रीफल और पेन भेंट कर पुरस्कृत किया। यह कदम महिलाओं के लिए प्रेरणादायी रहा और उन्होंने भी बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों में सहयोग का आश्वासन दिया।

बच्चों की पहली सांस्कृतिक प्रस्तुति

शिक्षिका साहू के प्रयासों से गांव के बच्चों ने पहली बार रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर मंच पर अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा और अभिव्यक्ति कौशल का प्रदर्शन किया। बच्चों को देखकर गांववाले भी गर्व से झूम उठे। बच्चों ने देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।

सराहना और प्रोत्साहन

कार्यक्रम में शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ने बच्चों और शिक्षिका की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास और सामाजिक जुड़ाव भी विकसित करते हैं।

इस मौके पर मुख्य अतिथि उदयराम कुंजाम, विशिष्ट अतिथि दुलेश्वरी कुंजाम, उपाध्यक्ष गोविंद सलाम, शिक्षाविद हेमिन ठाकुर, पंच रोहित कुंजाम सहित पूरे गांव के लोग मौजूद रहे। सभी ने शिक्षिका पुष्पलता साहू की इस पहल को राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के लिए प्रेरणादायी बताया।

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खोमेश्वर गुरूपंच बालोद

बालोद (छत्तीसगढ़) के एक वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी हैं, जिन्होंने पत्रकारिता को जनसेवा, पर्यावरण संरक्षण और जनहित के मुद्दों का सशक्त माध्यम बनाया है। प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और निजी चैनल के अनुभव के साथ, वे निरंतर समाज के जमीनी सरोकारों को मुखर रूप से उजागर करते रहे हैं।

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