बलरामपुर। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर ध्वज संहिता का पालन करना हर नागरिक और संस्था की जिम्मेदारी है। लेकिन बलरामपुर जिले के ग्राम सेवारी स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां ध्वज को समय पर नहीं उतारा गया, जिससे राष्ट्रीय ध्वज संहिता का उल्लंघन हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, 15 अगस्त 2025 को समिति प्रांगण में ध्वजारोहण किया गया था। नियमों के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को केवल दिन में सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही फहराने की अनुमति है। यानी स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के बाद शाम को सूर्यास्त से पहले तिरंगे को उतारना अनिवार्य होता है। लेकिन सेवारी स्थित इस समिति में ध्वज को निर्धारित समय पर नहीं उतारा गया और पूरी रात वहीं फहराता रहा। अगले दिन यानी 16 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे ध्वज को नीचे उतारा गया। यह कार्यवाही सीधे तौर पर राष्ट्रीय ध्वज संहिता का उल्लंघन है।
ग्रामीणों ने जताई नाराज़गी
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा को ठेस पहुंचती है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि समिति प्रबंधन ने गंभीर लापरवाही बरती है और जिम्मेदार अधिकारियों को समय रहते सजग रहना चाहिए था। ग्रामीणों ने इस मामले में प्रशासन से जांच कर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी ध्यान देते तो ऐसी स्थिति ही उत्पन्न नहीं होती।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा है और दोषियों पर उचित कार्रवाई करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि ध्वज तिरंगा केवल एक कपड़े का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह देश की आन-बान और शान का प्रतीक है। इसलिए इससे जुड़ी लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
ध्वज संहिता क्या कहती है?
भारत सरकार द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय ध्वज संहिता 2002 के अनुसार –
राष्ट्रीय ध्वज को केवल दिन में सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक ही फहराया जा सकता है।
ध्वज को जमीन पर गिराना, किसी भी प्रकार से फाड़ना या गलत तरीके से रखना अपराध की श्रेणी में आता है।
सरकारी कार्यालयों, संस्थानों और आम नागरिकों को इन नियमों का पालन करना आवश्यक है।
लोगों की राय
इस घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि आजकल बच्चों को स्कूलों में ध्वज संहिता का महत्व सिखाया जाता है, लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही नियमों की अनदेखी करने लगें तो यह चिंता का विषय है।
कई लोगों ने सोशल मीडिया पर भी नाराज़गी जताई है और लिखा है कि “राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान हर नागरिक का कर्तव्य है, चाहे वह किसी भी पद या संस्था में हो।”