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सरगुजा में रेत माफिया पर चुप्पी, ग्रामीणों को धमकाकर एसडीएम ने कराया रेत ढुलाई cgnews

सरगुजा जिले के उदयपुर में एसडीएम पर आरोप है कि उन्होंने ग्रामीणों और ट्रैक्टर चालकों को जेल भेजने की धमकी देकर रामगढ़ मंदिर तक रेत और मिट्टी ढुलाई का काम करवाया। अवैध रेत माफिया पर कार्रवाई नहीं होती लेकिन ग्रामीणों को परेशान किया जा रहा है।

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सरगुजा। जिले में रेत माफिया के आतंक और प्रशासन की चुप्पी को लेकर एक नया मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, उदयपुर तहसील के अंतर्गत रेंड नदी से घरेलू जरूरतों के लिए रेत लेने पहुंचे ट्रैक्टर चालकों और ग्रामीणों को एसडीएम ने जेल भेजने और कड़ी कार्रवाई की धमकी दी। यही नहीं, धमकी देकर उनके ट्रैक्टरों में रेत भरवाई गई और रामगढ़ मंदिर तक पहुंचवाकर मिट्टी धुलाई का काम भी उनसे ही करवाया गया।

इस घटना के बाद से ग्रामीणों और ट्रैक्टर चालकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अधिकारी न तो मजदूरी का पैसा दे रहे हैं और न ही किसी को इस बारे में बताने दे रहे हैं। बल्कि, यदि किसी ने आवाज उठाई तो उस पर सख्त कार्रवाई करने की धमकी दी जा रही है।

रेत माफिया पर कार्रवाई क्यों नहीं?

ग्रामीणों का सवाल है कि जब रेत माफिया खुलेआम रोजाना जेसीबी और पोकलेन मशीनों से नदी की रेत निकालकर सैकड़ों ट्रैक्टर-डंपरों में भरकर ले जाते हैं, तब प्रशासन चुप क्यों रहता है? उदयपुर, चैनपुर, कोरजा, जमगला, तराजू और कवल गिरी जैसे इलाकों में रोजाना रेत का अवैध उत्खनन होता है। लेकिन उन पर कोई रोक-टोक नहीं होती।

आरोप यह भी है कि असली रेत माफिया पर कार्रवाई करने की हिम्मत अधिकारियों में नहीं है। उल्टा, ग्रामीणों और गरीब ट्रैक्टर चालकों को डराकर उनसे मुफ्त में काम करवाया जा रहा है।

ग्रामीणों में नाराज़गी

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरगुजा एक आदिवासी इलाका है। यहां के लोग बेहद भोले-भाले हैं। प्रशासन इन्हीं की सादगी का फायदा उठाकर डर और धमकी के जरिए अपनी मनमानी करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे अपने घर की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए रेत लेने नदी जाते हैं, तो उन्हें अपराधी की तरह ट्रीट किया जाता है। जबकि बड़े स्तर पर हो रहे अवैध रेत उत्खनन पर अधिकारी आंख मूंदे रहते हैं।

घटना बनी चर्चा का विषय

रामगढ़ मंदिर में ट्रैक्टर चालकों से जबरन कराए गए इस काम ने इलाके में खूब चर्चा बटोरी है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर अधिकारियों को गरीबों और मजदूरों को धमकाकर काम कराने की क्या जरूरत थी? इस मामले ने ग्रामीणों के बीच असंतोष को और बढ़ा दिया है। लोग कह रहे हैं कि यदि प्रशासन ने जल्द ही रेत माफिया पर कार्रवाई नहीं की, तो वे विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।

जनता की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों ने ग्रामीणों और ट्रैक्टर चालकों को धमकाकर काम कराया, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, अवैध रेत उत्खनन पर भी तत्काल रोक लगनी चाहिए।

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