डिकेश शर्मा कांकेर। विकासखण्ड दुर्गूकोंदल में स्कूल भवनों की मरम्मत और निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि मुख्यमंत्री जनत योजना, विशेष केंद्रीय मद और समय शिक्षा मद से आई करोड़ों की राशि का गलत इस्तेमाल किया गया है। मरम्मत कार्य शाला प्रबंधन समिति (SMC) के जरिए होना था, लेकिन आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने ठेकेदारों से सांठगांठ कर सीधे उन्हें यह काम सौंप दिया।
स्कूलों में लीपापोती का आरोप
शिक्षकों और ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदारों ने मरम्मत के नाम पर केवल ऊपर-ऊपर लीपापोती की है। कहीं रंग-रोगन किया गया, तो कहीं टूटी दीवारों और छत की बस सतही मरम्मत की गई। इसके बावजूद पूरे काम का मूल्यांकन कर फर्जी तरीके से फाइलें बनाई गईं और शासन की राशि का बंदरबांट कर लिया गया।
शिक्षकों पर दबाव
आरोप यह भी है कि शिक्षकों पर शाला प्रबंधन समिति बनाने का दबाव डाला गया, लेकिन मरम्मत कार्य में उनकी राय नहीं ली गई और न ही हस्ताक्षर। शिक्षकों और समिति सदस्यों का कहना है कि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर भ्रष्टाचारपूर्ण तरीके से काम कराया गया है।
धरना और ज्ञापन
इस मामले को लेकर 7 अगस्त 2025 को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने और जांच की मांग की थी। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
घेराव की तैयारी
प्रदर्शनकारियों ने पहले ही शासन को लिखित सूचना दी थी कि यदि 17 अगस्त 2025 तक कार्रवाई नहीं की गई, तो 19 अगस्त को खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय दुर्गूकोंदल का घेराव किया जाएगा। अब तय तारीख नजदीक आने के साथ ही आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। ग्रामीणों, शिक्षकों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
आक्रोशित लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उच्च अधिकारियों की शह पर घटिया काम हुआ है और शासन के पैसे का दुरुपयोग किया गया है।
बड़ा आंदोलन होने के आसार
सूत्रों की मानें तो 19 अगस्त को होने वाला घेराव बड़ा रूप ले सकता है। ग्रामीण इलाकों से भारी संख्या में लोग शामिल होंगे। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।