डिकेश शर्मा । छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के दुर्गूकोंदल ब्लॉक मुख्यालय में शुक्रवार और शनिवार को धर्मांतरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, एक ईसाई धर्म मानने वाली महिला की मृत्यु के बाद उसके अंतिम संस्कार को लेकर ग्रामीणों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस पूरे मामले ने गांव की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को लेकर गहरी बहस छेड़ दी है।
निजी जमीन पर अंतिम संस्कार से विवाद
जानकारी के मुताबिक, मृत महिला के परिजनों ने अपने निजी जमीन पर अंतिम संस्कार की बात कही थी। लेकिन शुक्रवार की रात लगभग 8 बजे ग्राम पटेल, गायता और ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गांव की परंपरा और देव व्यवस्था को देखते हुए, मृतक महिला का अंतिम संस्कार गांव की सीमा में नहीं होने दिया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना था कि ईसाई धर्म अपनाने वाले लोगों द्वारा गांव में शव दफनाने से उनकी “ग्राम व्यवस्था और देव व्यवस्था” अपमानित होती है। इस पर मृत महिला के परिजनों ने आपत्ति जताई और कहा कि जमीन उनकी खुद की है, इसलिए वे वहीं अंतिम संस्कार करेंगे।
पुलिस ने संभाला मामला
विवाद बढ़ता देख पुलिस के अधिकारी – अनुविभागीय अधिकारी और थाना प्रभारी – मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने साफ कहा कि जबरन अंतिम संस्कार करने की कोशिश विवाद को जन्म दे सकती है। इसलिए न तो निजी जमीन पर और न ही सरकारी जमीन पर जबरन दफनाने की अनुमति दी जा सकती है।
सर्व समाज की बड़ी बैठक
अगले दिन शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण और सर्व समाज के लोग दुर्गूकोंदल मंडी प्रांगण में इकट्ठा हुए। यहां धर्मांतरण और गांव की परंपराओं को लेकर लंबी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि ईसाई धर्मांतरण से बस्तर की प्राचीन व्यवस्था और परंपराओं को नुकसान पहुंच रहा है।
सर्व समाज का सामूहिक निर्णय था कि –
अंचल में धर्मांतरण पूरी तरह से बंद होना चाहिए।
जो परिवार ईसाई धर्म में जा चुके हैं, उन्हें घर वापसी के लिए प्रेरित किया जाए।
ताकि भविष्य में अंतिम संस्कार और धार्मिक परंपराओं को लेकर विवाद न हो।
परिजनों ने भानुप्रतापपुर में किया अंतिम संस्कार
विवाद के बाद मृत महिला के परिजन, अपने धर्म संगठन के लोगों के साथ मिलकर शव को भानुप्रतापपुर ले गए और वहां ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया।
कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन
बैठक के बाद ग्रामीणों और सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने ग्राम पटेल और गायता के नेतृत्व में तहसीलदार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में धर्मांतरण रोकने और गांव की परंपराओं को बचाने की मांग की गई।
बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी बैठक और ज्ञापन सौंपने के दौरान ग्राम पटेल लालजी दुग्गा, गायता मानूराम दुग्गा, महत्तम दुग्गा, शिवप्रसाद नरेटी, अशोक जैन, विजय पटेल, रामचंद्र कल्लो, देवेंद्र टेकाम, जगत दुग्गा, झाड़ूराम उयका, नरेंद्र जैन, रमेश दुग्गा समेत बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं मौजूद रहीं।