बस्तर। बस्तर ब्लॉक के पिपलावण्ड और जामगुड़ा गांव के बीच पिछले 30 साल से चल रहे वनभूमि विवाद का आखिरकार समाधान हो गया। मंगलवार को वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 200 एकड़ वनभूमि को अतिक्रमण मुक्त करा लिया। यह जमीन लंबे समय से जामगुड़ा के 78 ग्रामीणों के कब्जे में थी।
मामला पिपलावण्ड के कक्ष क्रमांक 1089 पी. नया पीएफ 78 से जुड़ा है, जहां ग्रामीणों ने अवैध रूप से खेती कर रखी थी। इस वजह से पिपलावण्ड और जामगुड़ा के बीच तीन दशकों से तनातनी बनी हुई थी।
कैसे हुई कार्रवाई
मुख्य वन संरक्षक आरसी दुग्गा के निर्देश और वन मंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में उप वन मंडलाधिकारी आईपी बंजारे के नेतृत्व में वन अमला, उड़नदस्ता दल और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाया। मौके पर भानपुरी, बस्तर और करपावण्ड वन परिक्षेत्र के कर्मचारी पहुंचे और पुलिस बल के साथ जेसीबी मशीन लगाकर अतिक्रमण हटाया।
कार्रवाई के दौरान अवैध फसल को नष्ट किया गया, जल अवरोधक खंती और वॉटर रिचार्ज पिट खुदवाए गए। इसके साथ ही खाली कराई गई भूमि पर काजू के पौधे लगाए गए, ताकि दोबारा अतिक्रमण न हो और क्षेत्र में हरियाली बनी रहे।
कानूनी कदम
अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने 11 मुख्य आरोपियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया। इनमें पिपलावण्ड पुजारीपारा निवासी सोनसिंग (48), टोरका (60), जामगुड़ा निवासी विजय, बलिराम (22), सुदर, रामलाल, बृजलाल, दुलोराम, मानू और ललित शामिल हैं। इन सभी पर कोर्ट चालान की कार्रवाई भी की जा रही है।
लंबा चला विवाद
इस विवाद की शुरुआत करीब 30 साल पहले हुई थी, जब जामगुड़ा के कुछ ग्रामीणों ने पिपलावण्ड की वनभूमि पर कब्जा कर खेती शुरू कर दी थी। वन विभाग ने कई बार ग्रामीणों को समझाने और भूमि खाली करने की चेतावनी दी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आखिरकार, प्रशासन को कड़ा कदम उठाना पड़ा।
वन विभाग का संदेश
वन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वनभूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे वन क्षेत्र की जमीन को बचाने में सहयोग करें, ताकि पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा हो सके।