मथुरा – नंदगांव-बरसाना मार्ग पर शनिवार रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिला दिया। तेज रफ्तार में दौड़ती पुलिस की कार ने खेत जा रहे एक व्यक्ति को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि उसकी मौके पर ही हालत गंभीर हो गई। घायल को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने रोड जाम कर पुलिस चौकी का घेराव कर दिया। ( High speed police car took life in Mathura: Woman inspector accused, villagers create ruckus )
तेज रफ्तार कार पेड़ पर चढ़ी
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा इतना भयानक था कि कार टक्कर मारने के बाद सड़क किनारे पेड़ के ऊपर चढ़ गई। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि हादसे के बाद कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। लोग कहते हैं कि अगर कोई और वहां मौजूद होता तो जानलेवा स्थिति बन सकती थी।
घायल की पहचान बाबूलाल के रूप में
हादसे में घायल व्यक्ति की पहचान बाबूलाल के रूप में हुई है। वह रात में अपने खेत की ओर जा रहा था, तभी पीछे से आ रही तेज रफ्तार और अनियंत्रित कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। गंभीर हालत में बाबूलाल को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे बचा नहीं पाए।
ग्रामीणों का आरोप – गाड़ी चला रही थीं महिला दरोगा
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार चला कौन रहा था? ग्रामीणों का दावा है कि गाड़ी को कोकिलावन चौकी पर तैनात महिला दरोगा गुंजन चौधरी चला रही थीं। उनका कहना है कि घटना के बाद पुलिस ने अपने अफसर का बचाव करते हुए उन्हें तुरंत घटनास्थल से हटा दिया और मामले को अज्ञात वाहन के नाम पर दर्ज कर लिया।
घटनास्थल पर देर तक पड़ी रहीं दरोगा
गांव वालों का कहना है कि हादसे के बाद महिला दरोगा मौके पर काफी देर तक मौजूद थीं और वहीं पड़ी रहीं। बाद में अन्य पुलिसकर्मी पहुंचे और उन्हें अपने साथ ले गए। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत से ही सच को छिपाने की कोशिश की।
गुस्साए ग्रामीणों का बवाल
जैसे ही बाबूलाल की मौत की खबर गांव में पहुंची, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने नंदगांव-बरसाना रोड को जाम कर दिया। ग्रामीणों ने कोकिलावन पुलिस चौकी का भी घेराव किया और नारेबाजी की। उनका साफ कहना था कि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए और दोषी चाहे कोई भी हो, उसे सजा मिलनी चाहिए।
पुलिस की चुप्पी और सवालिया निशान
पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस अफसरों ने दरोगा के खिलाफ FIR दर्ज करने से बचने के लिए अज्ञात वाहन के नाम पर मुकदमा लिख दिया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या कानून के रखवाले अपने ही साथियों को बचाने के लिए पीड़ित परिवार को न्याय से वंचित कर रहे हैं?
मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा
घटना की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही है। कई लोग तस्वीरें और वीडियो शेयर कर पुलिस के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। खासतौर पर कार के पेड़ पर चढ़े होने की तस्वीरें इस बात का सबूत मानी जा रही हैं कि वाहन की रफ्तार कितनी खतरनाक थी।
परिवार की मांग – दोषियों को सख्त सजा
बाबूलाल के परिजनों का कहना है कि उनके घर के कमाने वाले सदस्य की मौत सिर्फ लापरवाही और पुलिसिया अहंकार के कारण हुई है। वे मांग कर रहे हैं कि दोषी महिला दरोगा पर तत्काल हत्या का मामला दर्ज हो और उसे गिरफ्तार किया जाए।
मामला अब प्रशासन के लिए चुनौती
यह घटना मथुरा पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। एक तरफ ग्रामीणों का गुस्सा कम नहीं हो रहा, तो दूसरी तरफ पुलिस पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। अगर समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो मामला और भी बड़ा बवाल खड़ा कर सकता है।