UPNEWS उन्नाव ज़िले के बीघापुर तहसील क्षेत्र के बारा सगवर थानांतर्गत स्थित सुप्रसिद्ध मां चंद्रिका देवी धाम इन दिनों एक खतरनाक हालात से गुजर रहा है। गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, बाढ़ का पानी घाट तक पहुंच चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि नाविक बिना किसी सुरक्षा इंतज़ाम के श्रद्धालुओं को नदी में सैर करा रहे हैं। (Unnao: Devotees’ lives at risk amid rising water level at Maa Chandrika Devi Dham – administration’s gross negligence)
ये कोई साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सीधी-सीधी जान से खिलवाड़ है। गंगा के तेज बहाव और उफान के बीच नाविक बिना लाइफ जैकेट और बिना किसी आपातकालीन इंतज़ाम के नाव चला रहे हैं। सिर्फ 30 रुपये प्रति सवारी कमाने के लालच में वे किसी भी वक्त कई जिंदगियों को नदी में डुबो सकते हैं।
बढ़ते जलस्तर के बीच मौत से खेल
इन दिनों गैर-प्रांतों में हुई भारी बारिश का असर उन्नाव तक देखने को मिल रहा है। गंगा उफान पर है और जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है। पानी का बहाव इतना तेज है कि जरा सी चूक नाव को डुबो सकती है। इसके बावजूद, मंदिर में दर्शन करने आए श्रद्धालु नाव की सैर के लिए मजबूर किए जा रहे हैं — और वो भी बिना किसी सुरक्षा साधन के।
नाविकों की यह हरकत साफ बताती है कि उन्हें श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई मतलब नहीं, बस जेब भरने की जल्दी है।
प्रशासन की आंखों पर पट्टी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गंगा घाट से मात्र 100 मीटर की दूरी पर पुलिस चौकी मौजूद है, लेकिन फिर भी नाविकों की इस खतरनाक मनमानी पर किसी की नजर नहीं पड़ रही।
क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है? क्या पुलिस को तब कार्रवाई करनी है जब गंगा में नाव पलटकर कई जिंदगियां लील ले? ऐसा लग रहा है कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं। ये सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि लापरवाही की हद है।
जान पर खेल – नाविकों की लालच
सिर्फ 30 रुपये किराया लेकर नाविक श्रद्धालुओं को गंगा के बीच तक ले जा रहे हैं। तेज बहाव, बढ़ता जलस्तर, और बाढ़ का खतरा – इनमें से किसी भी चीज़ की परवाह उन्हें नहीं। कई बार ऐसा देखा गया है कि बाढ़ के वक्त नाव जरा सी असंतुलित हुई तो पलक झपकते ही पानी में डूब सकती है। लेकिन नाविक इसे नजरअंदाज कर रहे हैं, क्योंकि उनकी नजर सिर्फ पैसों पर है।
श्रद्धालु भी कर रहे गलती
सच्चाई यह है कि श्रद्धालु भी खुद अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं। थोड़ी सी समझदारी और सावधानी बरती जाए तो ऐसे हादसे टाले जा सकते हैं। लेकिन तस्वीरें और वीडियो देखने पर साफ है कि कई लोग खुद भी इस खतरनाक सैर के लिए तैयार हो रहे हैं, मानो मौत को दावत दे रहे हों।
किसी भी वक्त हो सकता है बड़ा हादसा
तेज धारा और बढ़ते पानी में नाव का पलटना कोई नई बात नहीं। हर साल बाढ़ के मौसम में देशभर से ऐसी घटनाओं की खबरें आती रहती हैं, जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। अगर उन्नाव प्रशासन और पुलिस ने अब भी कार्रवाई नहीं की, तो मां चंद्रिका देवी धाम में भी कभी भी त्रासदी घट सकती है।
तत्काल कार्रवाई की जरूरत
नाव संचालन पर रोक – जब तक गंगा का जलस्तर सामान्य नहीं हो जाता, नाव संचालन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाए।लाइफ जैकेट अनिवार्य – किसी भी स्थिति में बिना लाइफ जैकेट के किसी को नाव में न बैठाया जाए। नाविकों पर सख्त कार्रवाई – जो भी नाविक नियम तोड़ते पाए जाएं, उनका लाइसेंस रद्द कर भारी जुर्माना लगाया जाए। पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए – घाट पर पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए और नाविकों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए।
प्रशासन की जिम्मेदारी
मां चंद्रिका देवी धाम एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र है। यहां रोज सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है।
अगर प्रशासन श्रद्धालुओं की जान की कीमत नहीं समझेगा, तो यह सिर्फ कुर्सी पर बैठे लोगों की नाकामी नहीं होगी, बल्कि जनता के भरोसे के साथ विश्वासघात भी होगा।
(Ganga is in spate at Maa Chandrika Devi Dham in Unnao, yet the boatmen are taking the devotees for a ride without life jackets. The administration’s negligence and the boatmen’s greed are inviting a big accident.)