रायसेन, 10 अगस्त 2025। (ction on Raisen Baby Convent School: Notice on irregular curriculum, inquiry committee formed) रायसेन के अशासकीय बेबी कॉन्वेंट स्कूल में अनियमित और नियमों के विपरीत पाठ्यक्रम पढ़ाने का मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने स्कूल के प्रधानाध्यापक और संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। तीन दिनों में जवाब नहीं देने पर स्कूल की मान्यता खत्म करने की कार्रवाई हो सकती है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
कुछ दिनों पहले मीडिया में खबर आई थी कि बेबी कॉन्वेंट स्कूल में छोटे बच्चों को जो पट्टी पहाड़े दिए गए हैं, उनमें हिंदी वर्णमाला के अक्षरों के साथ धर्म विशेष के प्रतीक चिन्ह और शब्द शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर — ‘क से काबा’, ‘न से नमाज’, ‘ह से हिजाब’। इसके अलावा चित्रों में काबा, नमाज अदा करते व्यक्ति और हिजाब पहनी महिला की तस्वीरें छपी थीं।
मान्यता गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी स्कूल में धर्म विशेष से जुड़ी प्रतीकात्मक सामग्री को पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। यह नियम आरटीई मान्यता प्रावधानों के अंतर्गत स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।
जिला शिक्षा अधिकारी की सख्ती
डीईओ डीडी रजक ने मामले को गंभीर मानते हुए स्कूल के प्रधानाध्यापक और संचालक को लिखित कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है। इसमें पूछा गया है कि क्यों न नियमों के उल्लंघन के चलते स्कूल की मान्यता समाप्त कर दी जाए।
स्कूल प्रबंधन को आदेश दिया गया है कि वे अपना जवाब सप्रमाण तीन दिन के भीतर जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष पेश करें। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या समय पर प्रस्तुत नहीं किया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जांच समिति का गठन
स्कूल में पढ़ाई जा रही सामग्री की जांच के लिए शिक्षा विभाग ने तीन सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें —
सुश्री ऐश्वर्या मूंदड़ा (सहायक संचालक)
अनिल दीक्षित (प्राचार्य, शासकीय सांदीपनी विद्यालय, सांची)
अयोध्या प्रसाद शर्मा (विकासखंड स्त्रोत समन्वयक, सांची)
को शामिल किया गया है।
यह समिति स्कूल की सभी शिक्षण सामग्री, किताबें और सहायक अध्ययन साधनों की जांच कर रिपोर्ट देगी।जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि स्कूल के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी। अगर यह साबित होता है कि पाठ्यक्रम में जानबूझकर धर्म विशेष की सामग्री शामिल की गई है, तो स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी अशासकीय स्कूलों को चेतावनी है कि वे पाठ्यक्रम में किसी भी प्रकार की धार्मिक या आपत्तिजनक सामग्री का इस्तेमाल न करें।