कोंडागांव। Rakshabandhan 2025 was free from the shadow of Bhadra Kaal, sisters celebrated the festival of love throughout the day इस साल रक्षाबंधन का त्योहार पूरी तरह खुशियों और उत्साह से भरा रहा। शनिवार, 9 अगस्त 2025 को पूरे देश में सुबह से ही गलियां और घर भाई-बहन के मिलन की रौनक से जगमगा उठे। बहनों ने सजी थाली में राखी और मिठाइयां रखकर भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा, माथे पर तिलक लगाया और उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। इस बार भद्रा काल का कोई साया न होने से बहनों ने बिना किसी जल्दबाजी के, सुबह से लेकर रात तक आराम से राखी बांधने का लुत्फ़ उठाया।
पिछले दो वर्षों में रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल की वजह से कई जगहों पर बहनों को देर रात तक इंतजार करना पड़ा था। शुभ मुहूर्त भद्रा काल खत्म होने के बाद ही शुरू होता था, जिसके चलते राखी बांधने का सिलसिला देर रात तक चलता था। लेकिन इस बार बहनों के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी, क्योंकि भद्रा काल का साया रक्षाबंधन वाले दिन नहीं था।
भद्रा काल एक दिन पहले ही खत्म
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस साल भद्रा काल 8 अगस्त को ही समाप्त हो गया था। इसका मतलब यह था कि रक्षाबंधन वाले दिन यानी 9 अगस्त को पूरे दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकती थीं। सुबह से ही बाजारों में चहल-पहल देखने को मिली, मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ रही और घर-घर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
सुबह से रात तक बंधा रक्षा सूत्र
कोंडागांव में सुबह से ही बहनें सज-धज कर भाइयों के घर पहुंचीं। किसी ने मिठाई के साथ राखी थाली सजाई, तो किसी ने पारंपरिक पूजा विधि के साथ राखी बांधी। दिनभर राखी बांधने का सिलसिला चलता रहा, और कई परिवारों में रात तक उत्सव की रौनक बनी रही। बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर, आरती उतारी और रक्षा सूत्र बांधकर उनके लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और हर मुश्किल से सुरक्षा की दुआ की।
परिवारों में उमंग और प्यार का माहौल
रक्षाबंधन का यह पर्व केवल रक्षा सूत्र बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिश्तों की गहराई को और मजबूत करता है। कई परिवारों में बहनें दूर-दराज से सफर कर भाइयों के पास पहुंचीं। वहीं, जो बहनें नहीं आ पाईं, उन्होंने डाक या ऑनलाइन माध्यम से राखी भेजकर अपना प्यार जताया।
कोरोना काल के बाद पहली बार खुलकर जश्न
पिछले कुछ साल कोरोना महामारी और भद्रा काल के कारण रक्षाबंधन का माहौल थोड़ा सीमित रहा था। लेकिन इस साल न कोई पाबंदी थी और न ही समय की रुकावट। ऐसे में भाई-बहन दोनों ने जमकर इस त्योहार का आनंद लिया। बाजार में मिठाई, उपहार, सजावटी राखियां और त्योहार से जुड़ी चीजों की बिक्री में भी इजाफा हुआ।
बहनों के लिए खास दिन
बहनों के लिए रक्षाबंधन साल का सबसे खास दिन होता है। कोंडागांव की रहने वाली राधा ने बताया, “हम सालभर इस दिन का इंतजार करते हैं। इस बार तो सुबह से ही राखी बांधना शुरू कर दिया और देर रात तक भाई-बहनों के बीच मुलाकात और हंसी-मजाक चलता रहा।”
भाई-बहन के रिश्ते की अनोखी मिसाल
रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में सुरक्षा, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के लिए प्रार्थना करती हैं, वहीं भाई भी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं। इस साल भद्रा काल न होने से यह पर्व और भी खास बन गया, क्योंकि बिना किसी समय सीमा के हर कोई खुलकर इसका आनंद ले सका।