गोवर्धन – आज पूरा गोवर्धन क्षेत्र भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की मिठास और स्नेह से सराबोर नजर आया। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर सुबह से ही गलियों, मोहल्लों और बाजारों में रौनक देखते ही बन रही थी। रंग-बिरंगी राखियों, मिठाइयों और उपहारों से सजे बाजारों में भाई-बहन के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।
सुबह होते ही बहनें पारंपरिक परिधान पहनकर पूजा की थालियों के साथ अपने भाइयों के घर पहुंचीं। थालियों में अक्षत, रोली, दीया, मिठाई और राखी सजाकर बहनों ने भाइयों को तिलक लगाया, राखी बांधी और मिठाई खिलाकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशियों की कामना की। बदले में भाइयों ने भी बहनों को उपहार और मिठाई देकर जीवनभर रक्षा का वचन दिया।
बाजारों में सुबह से ही भीड़
गोवर्धन के मुख्य बाजार, राखी मंडियां और मिठाई की दुकानों पर सुबह से ही खरीदारों की भीड़ लगी रही। हर तरफ से ‘राखी लो, राखी लो’ की आवाजें गूंज रही थीं। चटक रंगों और डिजाइन वाली राखियों से बाजार गुलजार थे। मिठाई की दुकानों पर गुलाब जामुन, रसगुल्ले, बर्फी और लड्डुओं की खुशबू से माहौल मीठा हो गया था।
रंगीन परंपरा और भावनाओं का संगम
रक्षाबंधन का त्योहार सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में प्यार और विश्वास को और गहरा करने का दिन है। गोवर्धन में आज यही नजारा देखने को मिला। कई परिवारों ने इस मौके पर विशेष पकवान बनाए। पूड़ी, कचौरी, आलू की सब्जी, मिठाई और ठंडाई से मेहमानों का स्वागत किया गया।
राखी में दिखा आधुनिक और पारंपरिक का मेल
इस बार बाजार में जहां पारंपरिक राखियों की चमक बरकरार रही, वहीं बच्चों और युवाओं के लिए कार्टून कैरेक्टर, फोटो प्रिंटेड और डिजाइनर राखियों ने भी लोगों का मन मोह लिया। पर्यावरण प्रेमियों के लिए बीज वाली और हैंडमेड राखियां भी खूब बिकीं।
परिवारों में उमंग और एकजुटता
त्योहार के मौके पर कई परिवार जो सालभर दूर-दूर रहते हैं, वे भी एक-दूसरे से मिलने पहुंचे। घर-आंगन में हंसी-खुशी और पुराने किस्से-कहानियों के साथ रिश्तों की गर्माहट महसूस की गई। बुजुर्गों ने बच्चों को रक्षाबंधन की परंपरा और महत्व के बारे में बताया।
भाई-बहन के रिश्ते का संकल्प
आज के दिन न केवल उपहारों का आदान-प्रदान हुआ, बल्कि यह संकल्प भी दोहराया गया कि चाहे वक्त जैसा भी हो, भाई-बहन एक-दूसरे की खुशी और सुरक्षा के लिए हमेशा साथ खड़े रहेंगे। यही इस त्योहार का असली संदेश है – रिश्तों में प्यार, सम्मान और विश्वास बनाए रखना।
गोवर्धन की गलियां बनीं प्रेम का प्रतीक
दिन भर बाजारों में चहल-पहल रही, घरों में पूजा और पकवानों की खुशबू फैलती रही और गलियों में बच्चों की हंसी गूंजती रही। रक्षाबंधन के इस खास दिन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि त्योहार सिर्फ रस्में नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने और खुशियां बांटने का जरिया हैं।