जितेंद्र साहू धमतरी, रक्षाबंधन का त्यौहार सिर्फ घरों और मोहल्लों में ही नहीं, बल्कि इस बार धमतरी जिला जेल में भी भाई-बहन के रिश्ते की मिठास से महक उठा। शनिवार सुबह से ही जेल परिसर में भावुक नज़ारे देखने को मिले, जब बहनें अपने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधने पहुंचीं। (Rakshabandhan in Dhamtari jail: Sisters tied Rakhi, imprisoned brothers took a pledge to reform)
जेल प्रशासन ने इस खास मौके के लिए विशेष इंतज़ाम किए। बाहर काउंटर लगाया गया, जहां आने वाली बहनों का पहचान पत्र देखकर नाम दर्ज किया गया। इसके बाद उन्हें तय समय पर अंदर बुलाया गया, जहां उनके भाई शिफ्ट-वाइस हॉल में बैठे थे। बहनों ने जैसे ही राखी बांधी, कई की आंखें भर आईं। इस दौरान उन्होंने भाइयों से वादा लिया कि जेल से बाहर आने के बाद वे सही रास्ते पर चलेंगे और जिंदगी को एक नई शुरुआत देंगे।
सहायक जेल अधीक्षक एन. के. डहरिया ने बताया कि जेल में कुल 247 बंदी हैं और रक्षाबंधन के मौके पर बहनों के आने-जाने के लिए सुबह 8:30 बजे से दोपहर 3 बजे तक का समय तय किया गया है। हालांकि, दूरदराज से आने वालों के लिए यह समय सीमा लचीली रखी गई है, ताकि कोई भी बहन अपने भाई को राखी बांधने से वंचित न रह जाए।
जेल के अंदर सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे। महिला गार्डों की तैनाती अंदर की गई, जबकि बाहर पुरुष पुलिस बल मौजूद रहा। किसी भी बहन को मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं थी। अगर कोई पुरुष रिश्तेदार साथ आया, तो उन्हें जेल परिसर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिली।
मिठाई खिलाने की भी विशेष व्यवस्था की गई। बंदी भाइयों को दी जाने वाली मिठाई का पहले परीक्षण किया गया। सोनपापड़ी जैसी सूखी मिठाई को प्राथमिकता दी गई, ताकि सुरक्षा नियमों का पालन हो सके।
रक्षाबंधन के इस अवसर पर माहौल भावुक और खुशियों से भरा रहा। बहनों की आंखों में अपने भाई के लिए चिंता और प्यार साफ झलक रहा था, वहीं भाइयों के चेहरों पर भी लंबे समय बाद अपने परिवार से मिलने की खुशी नजर आई।
जेल प्रशासन का कहना है कि ऐसे आयोजन न केवल बंदियों और उनके परिवारों के बीच रिश्तों को मजबूत करते हैं, बल्कि उनमें सुधार की भावना भी जगाते हैं। रक्षाबंधन जैसा त्यौहार उन्हें यह याद दिलाता है कि बाहर कोई उनका इंतज़ार कर रहा है और वे एक नई, सकारात्मक जिंदगी की शुरुआत कर सकते हैं।