UP commission strict on pension delay and land occupation, officials get warning उत्तर प्रदेश में पेंशन भुगतान में देरी, अवैध कब्जे और अधिकारियों की लापरवाही जैसे मामलों को लेकर पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग अब सख्त हो गया है। आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने शुक्रवार को इन्दिरा भवन स्थित कार्यालय में 38 मामलों की जनसुनवाई की और कई अफसरों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अब लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
इस जनसुनवाई के दौरान कई गंभीर मामले सामने आए। सबसे पहले मामला था राम आसरे सिंह का, जो सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, ग्रेच्युटी और राशिकरण का भुगतान पाने के लिए 63 दिनों तक इंतजार करते रहे। जबकि नियम के अनुसार अधिकतम 3 दिन के भीतर भुगतान होना चाहिए था। जब यह बात सामने आई, तो आयोग अध्यक्ष ने नाराजगी जाहिर करते हुए जवाहर भवन के सहायक कोषाधिकारी को आड़े हाथों लिया और संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की।
अफसरों की गैरहाजिरी पर सख्त चेतावनी
लखनऊ नगर निगम से जुड़ी फूलकेसरी कश्यप के मामले में जब कोई अधिकारी सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ, तो आयोग ने इसे गंभीरता से लिया। अध्यक्ष वर्मा ने चेतावनी दी कि अगली सुनवाई में भी अगर सक्षम अधिकारी गैरहाजिर रहे, तो नगर आयुक्त के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
विधवा दिव्यांग महिला की जमीन पर कब्जा, आयोग ने दिए तत्काल कार्रवाई के आदेश
बाराबंकी जिले की रहने वाली विधवा और दिव्यांग महिला मधु देवी के मामले ने आयोग का विशेष ध्यान खींचा। मधु देवी की जमीन पर अवैध कब्जा होने की शिकायत पर अध्यक्ष ने सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस को तुरंत जमीन खाली कराने और पीड़िता को न्याय दिलाने को कहा।
अयोध्या और अन्य जिलों से भी पहुंचे गंभीर मामले
अयोध्या के धनीराम वर्मा के मामले में संविदा समाप्त होने के बावजूद जमीन पर अवैध कब्जा बरकरार था। इस पर आयोग ने क्षेत्राधिकारी अयोध्या को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से कार्रवाई करें और अगली सुनवाई में रिपोर्ट के साथ उपस्थित हों।
रमेश सिंह और दिनेश कुमार के पेंशन मामलों में देरी पर भी आयोग ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को तुरंत भुगतान करने के निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी रिटायर्ड कर्मचारी को समय पर पेंशन मिलना उसका हक है और इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनसुनवाई में नदारद रहे अधिकारी हुए चिन्हित
सुनवाई में कई विभागीय अधिकारी अनुपस्थित रहे। इस पर आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि भविष्य में यदि अधिकारी जनसुनवाई में उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ शासन स्तर पर कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
राजेश वर्मा ने जनसुनवाई के दौरान यह भी कहा कि आयोग सिर्फ शिकायत सुनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रभावी कार्रवाई और परिणाम सुनिश्चित करेगा। आयोग की ओर से उठाए गए सख्त कदमों से यह संदेश साफ है कि अब प्रशासनिक लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।