लखनऊ। आज़ादी का अमृत महोत्सव अब जन-जन का उत्सव बनता जा रहा है। देशभर में “हर घर तिरंगा” अभियान को सफल बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ी पहल की है। इस बार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की महिलाएं मिलकर पूरे प्रदेश में 2 करोड़ तिरंगा झंडों का निर्माण करेंगी। ये झंडे हर गांव, हर मोहल्ले और हर घर तक पहुंचेंगे और 15 अगस्त को पूरे गौरव और सम्मान के साथ फहराए जाएंगे। (Women will make 2 crore flags for every home tricolor campaign: A big initiative of UP government)
इस काम की जिम्मेदारी खुद उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग और आजीविका मिशन को सौंपी है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि झंडा निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जाए और निर्धारित लक्ष्यों की समयसीमा में पूर्ति हो।
झंडा निर्माण का जिम्मा महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांवों में गठित महिला स्वयं सहायता समूहों को झंडा निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है। ये समूह हर जिले में सक्रिय हैं और पिछले साल भी इन्होंने जबरदस्त काम किया था। 2024 में 1.88 करोड़ तिरंगे बनाकर इन्होंने न केवल रिकॉर्ड बनाया था बल्कि उनकी गुणवत्ता की भी जमकर तारीफ हुई थी।
इस बार सरकार का लक्ष्य है कि 2 करोड़ झंडे बनाए जाएं और हर गांव में उनकी समय पर आपूर्ति की जाए।
निर्माण के साथ-साथ बिक्री भी कर सकेंगे समूह
इन समूहों को ये भी छूट दी गई है कि वो लक्ष्य से अधिक झंडों का निर्माण कर सकते हैं और फिर उन्हें स्थानीय बाजारों, मोहल्लों और पंचायतों में बेच सकते हैं। इस तरह समूहों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा और अभियान को भी जन-भागीदारी का रूप मिलेगा।
आजीविका मिशन की प्रमुख ने जिलाधिकारियों को दिए निर्देश
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि महिला समूहों को किसी तरह की वित्तीय हानि न हो इसका पूरा ध्यान रखा जाए। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि झंडों की बिक्री मिशन से जुड़े अन्य लाभार्थियों के माध्यम से भी करवाई जा सकती है।
सभी जिलों से झंडा निर्माण की रिपोर्टिंग एक तयशुदा गूगल शीट फॉर्मेट में की जाएगी और अभियान खत्म होने के तीन दिन के भीतर सभी रिपोर्टें मुख्यालय को भेजनी होंगी।
झंडा संहिता का होगा पूरा पालन
उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि झंडों के निर्माण में राष्ट्रीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) का पूरा पालन किया जाएगा। झंडों की सिलाई, रंग और माप सभी मानकों के अनुसार ही होंगे। सभी झंडे सम्मान और मर्यादा के साथ बनाए जाएंगे और ग्राम पंचायतों तक सीधे आपूर्ति की जाएगी।
निर्मित झंडों की आपूर्ति जिला स्तर पर स्वरोजगार उपायुक्त के माध्यम से की जाएगी और जहां आवश्यकता हो वहां जिलाधिकारी द्वारा नामित संस्था/विभाग को भी दिए जाएंगे।
एक जिले से दूसरे जिले में भी हो सकती है आपूर्ति
अगर किसी जिले में समूह तय लक्ष्य से ज्यादा झंडे बनाते हैं, तो उनकी आपसी समन्वय से दूसरे जिलों में आपूर्ति भी की जा सकती है। सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि 31 अगस्त 2025 तक सभी समूहों को उनका भुगतान कर दिया जाए और इसकी रिपोर्ट 5 सितंबर तक मिशन मुख्यालय को भेजी जाए।
दैनिक लक्ष्य तय, निगरानी के कड़े निर्देश
झंडा निर्माण का काम सुचारू रूप से और समय पर पूरा हो इसके लिए दैनिक लक्ष्य तय किए गए हैं। हर जिले को यह निर्देश दिए गए हैं कि वहां के समूहों द्वारा प्रतिदिन कितने झंडे बनाए जा रहे हैं उसकी निगरानी और रिपोर्टिंग की जाए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा है कि पिछले साल से ज्यादा संख्या में निपुण समूहों को इस काम में लगाया जाए और हर हाल में यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी ठेकेदार या बाहरी संस्था को इस काम में शामिल न किया जाए। यह काम सिर्फ महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ही होगा।
जन-जागरूकता भी होगी अभियान का हिस्सा
सरकार की योजना सिर्फ झंडा बनाने और फहराने की नहीं है, बल्कि इसके पीछे की भावना को भी जन-जन तक पहुंचाना है। इसलिए स्वयं सहायता समूहों, मिशन लाभार्थियों और आम नागरिकों को तिरंगे के महत्व और झंडा संहिता के नियमों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
राज्य सरकार चाहती है कि हर व्यक्ति अपने घर पर तिरंगा फहराए और गर्व के साथ देशभक्ति का प्रदर्शन करे। इसके लिए सरकार की सभी योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को भी तिरंगा क्रय कर फहराने के लिए प्रेरित किया जाएगा।