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एनएच 130 पर निर्माणाधीन पुल ढहने से मचा हड़कंप, विभागीय सफाई पर उठे सवाल

कोण्डागांव-नारायणपुर मार्ग पर निर्माणाधीन पुल ढहने से एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। विभाग ने इसे प्राकृतिक आपदा बताया, लेकिन स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इसे निर्माण में लापरवाही का नतीजा करार दिया। सुरक्षा उपकरणों की कमी और पहले से टूटे हिस्से को नजरअंदाज करना भी इस हादसे की गंभीरता को बढ़ाता है।

कोण्डागांव से नारायणपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130 पर कुम्हारपारा नाले पर बन रहा पुल अचानक ढह गया। इस हादसे में एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस दुर्घटना को प्राकृतिक आपदा बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है, लेकिन स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस दावे पर सवाल खड़े किए हैं।

PWD ने दी सफाई, लेकिन नहीं माने लोग
दुर्घटना के बाद PWD के राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग कोण्डागांव की ओर से बयान जारी हुआ, जिसमें कहा गया कि भारी बारिश और चट्टानों की वजह से स्लैब के नीचे मलबा जमा हो गया, जिससे स्लैब की नींव खिसक गई और पूरा ढांचा बह गया।

लेकिन स्थानीय समाजसेवी भूपेंद्र तिवारी और ग्रामीण इस दावे को मानने को तैयार नहीं हैं। भूपेंद्र तिवारी, जो 38 साल से कुम्हारपारा में रह रहे हैं, ने कहा कि घटना वाले दिन न तो भारी बारिश हुई थी और न ही इलाके में कोई पहाड़ी है, जिससे आपदा की बात को बल मिलता। उन्होंने इसे सीधे तौर पर खराब निर्माण और कमजोर नींव का नतीजा बताया।

घायल मजदूर की हालत गंभीर, विभाग की बातों से उलट
ग्राम पंचायत कुम्हारपारा के सरपंच हेम कोर्राम ने बताया कि हादसे के वक्त कई मजदूर मौके पर काम कर रहे थे। रमन विश्वकर्मा, जो बालोद जिले के कामकापाल गांव का निवासी है, गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे तुरंत जिला अस्पताल कोण्डागांव भेजा गया।

PWD ने जहां बयान में कहा कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ, वहीं मौके की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। सरपंच के मुताबिक, रमन पिछले कई दिनों से पुल निर्माण कार्य में लगा हुआ था और 25 जुलाई को यह हादसा हुआ।

पहले भी ढह चुका था पुल का हिस्सा, नहीं ली गई सीख
स्थानीय निवासी हरिलाल भारद्वाज, जो 40 वर्षों से गांव में रह रहे हैं, ने बताया कि पुल का एक हिस्सा सात-आठ दिन पहले ही गिर चुका था, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। अगर पुल वाहन संचालन के बाद गिरता, तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।

उन्होंने यह भी बताया कि मजदूरों के पास कोई भी सुरक्षा उपकरण नहीं था – न हेलमेट, न जैकेट, न ग्लव्स। ये सभी बातें बताती हैं कि निर्माण एजेंसी ने सुरक्षा मानकों को गंभीरता से नहीं लिया।

लोगों ने की जांच और कार्रवाई की मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बड़ा सवाल यह है कि – क्या यह सचमुच प्राकृतिक आपदा थी या फिर निर्माण में लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि घटिया सामग्री, अनियमित पर्यवेक्षण और जवाबदेही की कमी इस हादसे के पीछे की असली वजह है। वे मांग कर रहे हैं कि जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

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