बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले के कलेक्ट्रेट भू-अभिलेख शाखा में पदस्थ भृत्य राजेन्द्र किस्पोट्टा पर गांव के कई लोगों ने बड़े और गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्राम पुटसुरा के ग्रामीणों का कहना है कि किस्पोट्टा पिछले 12–13 सालों से अपने पद का दुरुपयोग कर निजी और सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रहा है, साथ ही विरोध करने वालों को कानूनी झंझटों में फंसा देता है।
पद का रौब दिखाकर फर्जी मुकदमे
ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग में नौकरी करने का धौंस दिखाते हुए किस्पोट्टा उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज करवा देता है। यहां तक कि वह अपनी बहन के नाम से भी पट्टा निरस्तीकरण के मामले दर्ज करवाता है, ताकि ग्रामीण अदालतों और कागजी कार्यवाही में उलझकर परेशान हो जाएं।
न्यायालय आदेश के बाद भी कब्जा
एक ग्रामीण ने बताया कि उनकी जमीन का कब्जा अदालत ने उन्हें वापस दिला दिया था, लेकिन इसके बावजूद किस्पोट्टा ने ट्रैक्टर से खेत की जोताई कर फसल नष्ट कर दी और फिर से जमीन पर कब्जा कर लिया। शिकायत करने पर पुलिस ने मामले को “जमीन विवाद” कहकर टाल दिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
कब्रिस्तान और तालाब पर कब्जे के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि किस्पोट्टा ने ग्राम पुटसुरा के कब्रिस्तान की करीब एक एकड़ जमीन पर भी कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं, अन्य शासकीय जमीन पर तालाब बनवाकर मछली पालन कर रहा है और सरकारी जमीन का व्यावसायिक उपयोग कर रहा है। आरोप यह भी है कि उसने बिना अनुमति सरकारी कब्जे की आधा एकड़ जमीन बेच भी दी है।
चचेरे भाइयों ने भी लगाए आरोप
सिर्फ ग्रामीण ही नहीं, बल्कि किस्पोट्टा के चचेरे भाइयों ने भी उस पर सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वह अपने पद और राजनीतिक पहुंच का गलत इस्तेमाल कर रहा है।
ग्रामीणों की मांग – कार्रवाई और तबादला
लगातार हो रही इन घटनाओं से तंग आकर पीड़ित ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। इसमें कर्मचारी के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही, ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि राजेन्द्र किस्पोट्टा को किसी अन्य ब्लॉक या तहसील में स्थानांतरित किया जाए, ताकि वे फर्जी मुकदमों से बच सकें और जमीन विवादों से राहत पा सकें।
प्रशासन पर भी सवाल
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब शिकायतें कई बार की जा चुकी हैं, तो अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। लोगों का कहना है कि अगर ऐसे मामलों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी कर्मचारियों द्वारा पद का दुरुपयोग और बढ़ेगा, जिससे आम जनता का भरोसा प्रशासन से उठ जाएगा।
जांच की उम्मीद
फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि कलेक्टर कार्यालय उनकी शिकायत पर गंभीरता से विचार करेगा और मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई होगी और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।
यह मामला केवल जमीन कब्जा और फर्जी मुकदमों का नहीं है, बल्कि यह एक सरकारी कर्मचारी के पद के दुरुपयोग का उदाहरण है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह और भी बड़े विवाद का रूप ले सकता है। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।