लखनऊ के पं. दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (SIRD) में हाल ही में एक खास प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसने बच्चों की शुरुआती शिक्षा को लेकर एक नई उम्मीद जगाई है।इस कार्यक्रम का नाम है “वंडर बॉक्स” पर आधारित प्रशिक्षण, जिसका मकसद 3 से 6 साल के बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के तरीकों को बढ़ावा देना है।
यह ट्रेनिंग 4 और 5 अगस्त 2025 को हुई। इसमें प्राथमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। इसका मकसद था, शिक्षकों को ‘वंडर बॉक्स’ यानी ‘जादुई पिटारा’ का सही इस्तेमाल सिखाना। यह जादुई पिटारा, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) का एक बेहतरीन पहल है, जिसके जरिए छोटे बच्चों को खेल-खेल में मजेदार तरीके से पढ़ाया जा सकता है।
गुड गवर्नेंस पर भी हुआ एक अहम कार्यक्रम
इसी संस्थान में 5 से 7 अगस्त तक एक और अहम प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम “गुड गवर्नेंस” यानी सुशासन पर आधारित है। इसमें सरकारी विभागों के अधिकारी और स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसका मकसद शासन प्रणाली को और बेहतर, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
इस कार्यक्रम के दौरान, कई जाने-माने विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। इनमें से एक थे, भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सलाहकार और राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर उमेश चंद्र जोशी। उन्होंने सुशासन के तीन सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर दिया: सहभागिता, पारदर्शिता और जवाबदेही। उन्होंने बताया कि कोई भी शासन प्रणाली तब तक सफल नहीं हो सकती, जब तक उसमें ये तीनों गुण न हों।
जादुई पिटारा: बच्चों के सीखने का नया तरीका
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सबसे दिलचस्प बात रही, वंडर बॉक्स पर चर्चा। मशहूर शिक्षाविद् और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य ने इस विषय पर एक शानदार व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि 3 से 6 साल की उम्र में बच्चों का दिमाग बहुत तेजी से विकसित होता है। इस दौरान वे चीजों को बहुत जल्दी सीखते हैं।
डॉ. शाक्य ने कहा कि इस उम्र में बच्चों पर जटिल और मुश्किल चीजें थोपने के बजाय, हमें उन्हें ऐसी चीजें सिखानी चाहिए जो वे आसानी से समझ सकें और खेल-खेल में सीख सकें। वंडर बॉक्स इसी सिद्धांत पर काम करता है। इसमें खिलौने, पहेलियां और कहानियों के जरिए बच्चों को अक्षर ज्ञान, गणित और अन्य कौशल सिखाए जाते हैं।
मानोदय सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष वरुण विद्यार्थी ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और बच्चों की सोच और माता-पिता के सामने आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने अपने अनुभव से बताया कि बच्चों को समझने और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए माता-पिता को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा की याद
कार्यक्रम के अंत में, संस्थान के महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू ने सभी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा को याद किया और बताया कि कैसे हमारे ऋषि-मुनि गुरुकुल में बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी देते थे। उन्होंने कहा कि आज के समय में भी हमें इसी तरह की शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिसमें बच्चों का सर्वांगीण विकास हो।