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RAISEN: खेत में धान लगाते समय करंट की चपेट में आए चार मजदूर, दो की मौत

मध्य प्रदेश के रायसेन में एक दर्दनाक हादसा हुआ। उदयपुरा के रोसरा गांव में खेत में धान लगाते समय 4 मजदूर बिजली के करंट की चपेट में आ गए। हादसे में रामू और ओमकार अहिरवार की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हैं। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

​रायसेन, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ खेत में धान लगा रहे चार मजदूर बिजली के करंट की चपेट में आ गए। इस हादसे में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हैं। एक घायल की हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल रेफर किया गया है।


​कैसे हुआ ये हादसा?
​यह दर्दनाक हादसा मंगलवार की सुबह करीब 11 बजे उदयपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम रोसरा में हुआ। ग्राम कुचवाड़ा के रहने वाले चार मजदूर रोसरा गांव में एक खेत में धान लगा रहे थे। तभी रामू अहिरवार (उम्र 19) एक मवेशी को भगाने के लिए खेत की मेड़ पर गए। मेड़ पर लगी तारों की बाड़ (फेंसिंग) में बिजली का करंट आ रहा था, जिसकी चपेट में आकर रामू बुरी तरह चिपक गए।


​रामू को करंट से चिपका देखकर, ओमकार अहिरवार (उम्र 23) उन्हें बचाने के लिए दौड़े, लेकिन वह भी करंट की चपेट में आ गए। अपने दोनों बेटों को तार से चिपका देख, हरिशंकर अहिरवार भी उन्हें बचाने के लिए भागे और वह भी करंट की चपेट में आ गए।


​ग्रामीणों की मदद से बचाया गया
​हादसे के बाद ग्रामीणों की मदद से चारों लोगों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुरा ले जाया गया। वहाँ डॉक्टरों ने रामू अहिरवार और ओमकार अहिरवार को मृत घोषित कर दिया। वहीं, रामकृष्ण अहिरवार को प्राथमिक इलाज के बाद, उनकी गंभीर हालत को देखते हुए रेफर कर दिया गया। हरिशंकर अहिरवार के हाथ की उंगलियां भी करंट से बुरी तरह जल गई थीं, जिनका इलाज किया गया।


​उदयपुरा थाना के टीआई जयवन्त सिंह ककोडिय़ा ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम के बाद दोनों शवों को परिजनों को सौंप दिया गया है।


​टोल नाके पर हंगामा और फिर समझौता
​पोस्टमार्टम के बाद जब परिजन दोनों युवकों के शवों को एक ही गाड़ी में लेकर जा रहे थे, तो टोल नाके पर पहुंचने के बाद उन्होंने हंगामा करना शुरू कर दिया। परिजन शवों को वापस थाने ले आए और अपनी नाराजगी जाहिर करने लगे।
​मामले की गंभीरता को देखते हुए, तहसीलदार दिनेश बरगले और टीआई जयवन्त सिंह ककोडिय़ा ने परिजनों को समझाया। अधिकारियों की समझाइश के बाद परिजन शांत हुए और शवों को वापस कुचवाड़ा ले गए।


​यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि खेतों में इस्तेमाल होने वाली बिजली की फेंसिंग कितनी खतरनाक हो सकती है। सुरक्षा के नियमों का पालन करना कितना जरूरी है, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

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