Dikesh Sharma Durgukonda l छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के ग्राम हाहालद्दी में मधुमक्खियों के हमले से घायल हुए एक 50 वर्षीय किसान अंजुमराम नरेटी की इलाज के दौरान मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा शनिवार सुबह करीब 10 बजे हुआ, जब अंजुमराम अपने खेत में काम करने गए थे और अचानक सैकड़ों मधुमक्खियों ने उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल अंजुमराम को परिजनों और ग्रामीणों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुर्गूकोंदल में भर्ती कराया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप
मृतक के भाई शिवप्रसाद नरेटी और ग्रामीण अनिल सिन्हा का कहना है कि अंजुमराम को समय पर बेहतर इलाज नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें न तो समय पर जिला अस्पताल रिफर किया गया और न ही ज़रूरी दवाइयां उपलब्ध थीं। परिजनों के अनुसार, अगर डॉक्टर समय पर अंजुम को हायर सेंटर भेजते, तो उसकी जान बच सकती थी।
परिजनों का बयान
शिवप्रसाद नरेटी ने बताया, “सुबह 10 बजे अंजुमराम खेत में ही था, तभी मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। वह पूरी तरह घायल हो गया था। हम लोग 11 बजे उसे अस्पताल ले आए, लेकिन वहां दवाइयों की व्यवस्था नहीं थी और डॉक्टरों ने गंभीरता नहीं दिखाई। न तो सही इंजेक्शन लगाया गया और न ही समय पर रेफर किया गया।”
अनिल सिन्हा ने कहा, “अगर अस्पताल में सुविधा होती या सही समय पर रेफर किया जाता तो अंजुमराम की जान बच सकती थी। डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से ही उनकी मौत हुई है। हम मांग करते हैं कि इस मामले में जिम्मेदार डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की जाए।”
डॉक्टरों का पक्ष
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुर्गूकोंदल की प्रभारी डॉ. अल्का मरकाम ने कहा कि मरीज को 11 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्होंने बताया, “अंजुमराम को आईएम इंजेक्शन लगाकर तुरंत इलाज शुरू किया गया। लेकिन उसके शरीर में सूजन इतनी ज्यादा थी कि आईवी इंजेक्शन लगाना संभव नहीं हो रहा था। इसलिए हमने तुरंत जिला अस्पताल रेफर किया, साथ ही एंबुलेंस भी उपलब्ध थी।”
डॉ. मरकाम के अनुसार, अंजुमराम के भाई ने रिफर से मना कर दिया। उन्होंने कहा, “मृतक का भाई खुद अकेला था और उसे बाहर ले जाने की स्थिति में नहीं था। इसके बावजूद हमारी टीम ने मरीज को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी मौत हो गई।”
ग्रामीणों में आक्रोश
इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त सुविधाएं और दवाइयां होतीं, तो इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकती थीं। लोगों की मांग है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीरता दिखाए और इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और परिजनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि डॉक्टरों की लापरवाही के इस मामले की जांच कर उचित कदम उठाए जाएं। साथ ही मृतक किसान के परिवार को मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है।