छत्तीसगढ़ में इस साल मानसून ने अब तक संतोषजनक प्रदर्शन किया है। राज्य में 1 जून से 31 जुलाई 2025 तक कुल 621.5 मिलीमीटर औसत बारिश दर्ज की गई है। ये जानकारी राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा संचालित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त हुई है।
बारिश के ये आंकड़े कृषि और ग्रामीण जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। खासकर किसानों के लिए ये राहत की खबर है, जो धान की रोपाई जैसे कार्यों में व्यस्त हैं।
बलरामपुर सबसे आगे, बेमेतरा सबसे पीछे
जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक, अब तक सबसे ज्यादा बारिश बलरामपुर जिले में 950.9 मिमी दर्ज की गई है। वहीं, सबसे कम बारिश बेमेतरा जिले में 324.2 मिमी हुई है। यह अंतर साफ दर्शाता है कि प्रदेश में कुछ इलाकों में मानसून मेहरबान रहा है, तो कहीं अभी और इंतजार बाकी है।
रायपुर संभाग में कैसा रहा मौसम?
रायपुर – 576.7 मिमी
बलौदाबाजार – 553.3 मिमी
गरियाबंद – 492.3 मिमी
महासमुंद – 532.4 मिमी
धमतरी – 494.3 मिमी
इस संभाग में बारिश औसत के करीब रही है, जिससे खेती-किसानी को गति मिली है।
बिलासपुर संभाग की स्थिति
बिलासपुर – 670.1 मिमी
मुंगेली – 678.4 मिमी
रायगढ़ – 770.7 मिमी
जांजगीर-चांपा – 849.9 मिमी
कोरबा – 671.6 मिमी
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही – 620.0 मिमी
सारंगढ़-बिलाईगढ़ – 579.2 मिमी
सक्ति – 721.1 मिमी
इस संभाग में भी अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश हुई है।
दुर्ग संभाग में बारिश का हाल
दुर्ग – 505.9 मिमी
कबीरधाम – 471.5 मिमी
राजनांदगांव – 578.2 मिमी
बालोद – 590.1 मिमी
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी – 789.1 मिमी
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई – 448.8 मिमी
यहां बारिश की मात्रा ज़्यादातर जिलों में संतोषजनक रही है।
सरगुजा संभाग की बारिश रिपोर्ट
सरगुजा – 440.0 मिमी
सूरजपुर – 759.0 मिमी
जशपुर – 705.1 मिमी
कोरिया – 700.4 मिमी
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – 655.7 मिमी
उत्तरी छत्तीसगढ़ में भी मानसून की पकड़ मजबूत नजर आई है।
बस्तर संभाग में मानसून की मेहरबानी
बस्तर – 721.2 मिमी
कोंडागांव – 469.8 मिमी
नारायणपुर – 591.9 मिमी
बीजापुर – 803.2 मिमी
सुकमा – 494.2 मिमी
कांकेर – 639.0 मिमी
दंतेवाड़ा – 662.0 मिमी
बस्तर संभाग के कई जिलों में जोरदार बारिश हुई है, जिससे ग्रामीण इलाकों में जलस्तर बेहतर हुआ है।
किसानों को राहत, लेकिन कुछ जिलों में इंतजार
जहां कई जिलों में बारिश सामान्य से अधिक रही है, वहीं बेमेतरा, सरगुजा और कोंडागांव जैसे कुछ जिलों में अभी और बारिश की ज़रूरत महसूस की जा रही है। किसानों को उम्मीद है कि अगस्त में मानसून और सक्रिय होगा, जिससे धान की फसल को संजीवनी मिलेगी।