Raisen Moong sprouts due to heavy rain देवरी क्षेत्र में पिछले 10 से 15 दिनों से अपनी मूंग की फसल बेचने के लिए कतार में लगे किसानों की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने किसानों की चिंता को दोगुना कर दिया है। खरीदी केंद्रों पर फसल की खरीदी में हो रही देरी और मौसम की मार ने किसानों को आर्थिक नुकसान की कगार पर ला खड़ा किया है।
deori के राज राजेश्वरी वेयरहाउस में मूंग बेचने के लिए ट्रालियों में लाइन लगाए बैठे किसानों की फसल अब अंकुरित होने लगी है। बारिश के कारण ट्रालियों में नमी भर गई है, जिससे मूंग भीग कर खराब हो रही है। कुछ किसानों ने बताया कि खरीदी केंद्रों में व्यवस्था ठीक नहीं है और फसल ढंकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिसकी वजह से अब उनकी उपज का मूल्य कम हो सकता है या खरीदी से पूरी तरह इनकार हो सकता है।
खरीदी में देरी बनी किसानों की परेशानी का कारण
किसानों का कहना है कि मूंग की फसल तैयार होने के बाद वे बड़े भरोसे के साथ केंद्र पहुंचे थे, लेकिन खरीदी केंद्रों पर काम की रफ्तार बेहद धीमी है। कई किसानों की ट्रालियां 10 से 15 दिनों से लाइन में लगी हैं और वे हर दिन बारिश के बीच अपनी फसल की निगरानी कर रहे हैं। बावजूद इसके, वे इसे भीगने और अंकुरित होने से नहीं बचा पा रहे हैं, जिससे अब फसल खराब होने का डर सता रहा है।
स्थानीय किसान ने बताया, “हम रात-दिन ट्राली के पास बैठे हैं, लेकिन बारिश कहां रुकने वाली है? ऊपर से खरीदी भी धीमी है। अब मूंग अंकुरित होने लगी है, जिससे कीमत भी कम मिलेगी या खरीद ही नहीं होगी।”
प्रशासन से तेजी की मांग
किसानों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि बारिश को देखते हुए मूंग की खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि आगे और नुकसान से बचा जा सके। उनका कहना है कि अगर अभी भी खरीदी नहीं हुई, तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।
किसान संघ के प्रतिनिधियों ने यह भी सुझाव दिया कि खरीदी केंद्रों पर तत्काल टेंट, तिरपाल और ड्रेनेज की सुविधा मुहैया कराई जाए, ताकि फसल को बारिश से बचाया जा सके।
खेती-किसानी पर बारिश का असर
एक ओर जहां बारिश किसानों के लिए खेती की दृष्टि से वरदान मानी जाती है, वहीं जब यह अति हो जाती है, तो यही वर्षा किसानों के लिए अभिशाप बन जाती है। मूंग जैसी दलहन फसलें बारिश में भीगने पर तेजी से अंकुरित हो जाती हैं, जिससे उसका विपणन मूल्य शून्य के बराबर हो जाता है। यही हाल अब देवरी क्षेत्र के किसानों का है, जो दिन-रात मेहनत कर उपज तैयार करते हैं और फिर मंडियों में खड़े होकर मौसम के रहमोकरम पर फसल की कीमत का इंतजार करते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी?
अब तक इस विषय पर प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। लेकिन किसानों की लगातार बढ़ती परेशानी और बिगड़ते मौसम को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही खरीदी केंद्रों पर कार्य में तेजी लाई जाएगी।