Chhattisgarh के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रामानुजगंज नगर क्षेत्र में स्थित लरंगसाय चौक एक बार फिर चर्चाओं में है। लेकिन इस बार वजह विकास की सराहना नहीं, बल्कि उसके खोखले दावों पर उठते सवाल हैं। जिस यात्री प्रतीक्षालय को सरकार ने विकास की मिसाल बताया था, वह आज गंदगी, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की पहचान बन गया है।
नेता मस्त, जनता त्रस्त: विकास या दिखावा?
भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार के कार्यकाल में बने इस प्रतीक्षालय को कभी ‘विकास के स्वर्णिम युग’ का प्रतीक बताया गया था। उद्घाटन के दौरान नेताओं ने जमकर फोटो खिंचवाई, फीता काटा गया और अखबारों में बयान छपे कि “अब यात्रियों को मिलेगा बेहतर इंतजार स्थल”। लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रतीक्षालय अब महज एक “फोटो प्वाइंट” बनकर रह गया है, जहां नेता केवल चुनावी मौसम में नजर आते हैं।
जनता का दर्द: बैठने को जगह नहीं, सुविधाएं नदारद
बारिश हो या धूप, यात्रियों के लिए राहत की कोई व्यवस्था यहां मौजूद नहीं है। टूटी हुई बेंचें, गंदगी से भरा परिसर, बिजली और शौचालय की कोई सुविधा नहीं, और सड़कें तो इतनी खराब हैं कि पानी भरा रहता है, जिससे फिसलन और दुर्घटनाओं का खतरा हर समय बना रहता है।
एक स्थानीय दुकानदार ने कहा –
“हम हर दिन देखते हैं कि लोग आते हैं, बैठने की जगह नहीं, शौचालय नहीं, पानी तक का इंतजाम नहीं। ये कैसा प्रतीक्षालय है?”
विकास की जगह बदहाली का अड्डा
ये प्रतीक्षालय अब एक ऐसी जगह बन चुका है, जो शासन और प्रशासन की उदासीनता की पोल खोल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब विकास की बात की जाती है तो केवल बड़ी-बड़ी घोषणाएं होती हैं, लेकिन ज़मीन पर उनका असर नजर नहीं आता।
लोग पूछ रहे हैं –
क्या विकास सिर्फ उद्घाटन तक ही सीमित है?
क्या जनता की बुनियादी सुविधाओं की अब कोई अहमियत नहीं रह गई?
क्या सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट और भाषणों में ही जनता की चिंता होती है?
राजनीति में विकास सिर्फ वोट बैंक?
विपक्ष का आरोप है कि सत्ता में बैठी सरकार केवल प्रचार में विश्वास रखती है, जबकि जनता को रोज़मर्रा की समस्याओं से जूझना पड़ता है। वहीं प्रशासन भी इस ओर आंख मूंदे बैठा है।
शहर के युवाओं का कहना है कि उन्होंने उम्मीद की थी कि यह प्रतीक्षालय आसपास के यात्रियों और छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगा, लेकिन यह जगह अब बदइंतजामी और भ्रष्ट निर्माण कार्यों का जीता-जागता उदाहरण बन गई है।