गुरुर (छत्तीसगढ़)। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में गायत्री प्रज्ञा पीठ जेवरतला के कला मंच में बाल संस्कार शाला का शुभारंभ हुआ। इस आयोजन का मकसद गांव के बच्चों को नैतिक मूल्यों, जीवन की कला और अच्छे संस्कारों से जोड़ना है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हरिकृष्ण गंजीर, सभापति जनपद पंचायत गुरुर थे। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे हर रविवार सुबह 10 बजे नियमित रूप से शाला में उपस्थित हों और साफ-सुथरे कपड़े पहनकर आएं।
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अध्यक्षता सरपंच और अतिथियों की मौजूदगी
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती लिलेश्वरी साहू, सरपंच ग्राम पंचायत जेवरतला ने की। वहीं विशेष अतिथि के रूप में श्री यशवंत साहू (संयोजक हीरक मंडल मोहारा), श्रीमती चंद्रकिरण साहू, श्रीमती नीलिमा साहू, श्रीमती मीना साहू,लखनलाल साहू,खोरबाहरा साहू, औरनरेंद्र सिंह साहू भी मौजूद रहे।
इस बाल संस्कार शाला में ग्राम के कक्षा 5वीं से 8वीं तक के लगभग 40 बच्चों ने हिस्सा लिया। सभी बच्चे पूरे उत्साह के साथ उपस्थित रहे।
बच्चों को मिलेंगे संस्कार, अनुशासन और सम्मान के पाठ
मुख्य अतिथि डॉ. गंजीर ने अपने उद्बोधन में कहा कि बाल संस्कार शाला बच्चों के लिए संस्कारों की पाठशाला है। यहां उन्हें माता-पिता और गुरुओं का सम्मान करना, अनुशासन में रहना, समाज में अच्छे व्यवहार और जीवन में नैतिकता का महत्व सिखाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ये संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व विकास में बहुत काम आएंगे।
पढ़ाई के साथ खेल, कविता और हंसी-ठिठोली भी
संस्कार शाला में बच्चों को केवल पाठ्य विषयों की शिक्षा ही नहीं दी जाएगी, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की कला, योग, कविताएं, चुटकुले, खेलकूद और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियां भी कराई जाएंगी। यह एक ऐसा मंच होगा, जहां बच्चा हर पहलू से विकसित हो सकेगा।
यहां एक खास बात यह भी देखने को मिली कि जिस भी बच्चे का जन्मदिन होता है, उसका दीप जलाकर जन्मदिन मनाया जाता है, जिससे बच्चों को आत्मसम्मान और सामूहिक भावना की सीख मिलती है।
समर्पित शिक्षिकाएं कर रहीं मार्गदर्शन
संस्कार शाला में बच्चों को शिक्षित और मार्गदर्शित करने का काम कुमारी हेमपुष्पा साहू, रीमा साहू, यामिनी साहू, दुर्गेश साहू और किरणलता साहू कर रही हैं। ये सभी आचार्य पूरी निष्ठा के साथ बच्चों को शिक्षा और संस्कार देने में जुटी हैं।
गांव के लोगों की भागीदारी से बना प्रेरक आयोजन
इस शुभ अवसर पर ग्राम जेवरतला के वरिष्ठ जन और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे। उन्होंने इस आयोजन की सराहना की और कहा कि इस तरह की संस्कार शालाएं गांव के बच्चों को गलत राह से बचाकर बेहतर नागरिक बनने की दिशा में तैयार करती हैं।
ग्रामीणों ने गायत्री परिवार और संस्कारशाला से जुड़ी टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह पहल निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी को बेहतर दिशा देगी।
निष्कर्ष
गुरुर क्षेत्र के जेवरतला गांव में शुरू हुई यह बाल संस्कार शाला सिर्फ एक शैक्षणिक केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों का एक जीवंत केंद्र बन रही है, जहां शिक्षा के साथ बच्चों को मानवता, सेवा, सम्मान और आत्मविकास की गहरी समझ दी जा रही है। यह आयोजन गांव और समाज के लिए एक प्रेरणा है, जिससे बच्चों में अच्छे संस्कारों का बीजारोपण होगा