रायसेन जिले के औबेदुल्लागंज में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत खराब है. सरकार का सपना था कि आयुष्मान आरोग्य केंद्रों के ज़रिए गाँवों तक अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचें, ताकि ग्रामीणों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े और सारी जानकारी डिजिटल हो सके. मगर, यहाँ के आरोग्य केंद्रों पर अकसर ताले लटके रहते हैं, जिसका सीधा नुकसान गाँव की आम जनता, खासकर गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों को उठाना पड़ रहा है.
ताला लगा, तो जाएँ कहाँ?
औबेदुल्लागंज ब्लॉक में कुल 29 आरोग्य केंद्र हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें से ज़्यादातर समय पर खुलते ही नहीं. इसका जीता-जागता उदाहरण है ग्राम बिनेका बोरपानी का आरोग्य केंद्र. यहाँ ये केंद्र हफ्ते में बमुश्किल एक या दो दिन ही खुलता है, और वो भी कुछ ही घंटों के लिए. बाकी समय तो बस ताला लटका रहता है.
सोचिए, ऐसे में गर्भवती महिलाओं को समय पर दवाइयाँ कैसे मिलेंगी? उनकी ज़रूरी जाँचें कैसे होंगी? जब कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) ही कभी-कभार आती हैं, तो मरीज बेचारे क्या करें? उन्हें मजबूरन या तो सुल्तानपुर या फिर गौहरगंज के स्वास्थ्य केंद्र भागना पड़ता है, जो उनके लिए काफी दूर और मुश्किल भरा होता है.
एक महिला ने नाम न छापने की शर्त पर अपनी परेशानी बताई, “यहाँ आरोग्य केंद्र कभी-कभार खुलता है. कोई जाँच नहीं होती, न ही दवाइयाँ मिलती हैं. गर्भवती महिलाओं के एमसीपी कार्ड बिना जाँच के ही भर दिए जाते हैं. ऑनलाइन तो पूरा रिकॉर्ड दिखता है, लेकिन असल में कार्ड पर कुछ नहीं होता. हम इलाज कराने आते हैं, ताला देखकर वापस लौट जाते हैं. कई बार तो हमें इलाज के लिए सुल्तानपुर या गौहरगंज भागना पड़ता है.”
नवजात भी परेशान, ‘CM हेल्पलाइन’ की शिकायत पर दबाव!
स्थानीय निवासी मधु नायक की आपबीती सुनकर तो और भी दुख होता है. उन्होंने बताया, “20 दिन पहले मेरा बच्चा हुआ है. पिछले तीन दिन से उसे बुखार आ रहा है. मैं रोज़ आरोग्य केंद्र जा रही हूँ, लेकिन वहाँ ताला लटका मिलता है. आज मजबूरी में आशा कार्यकर्ता को साथ लेकर बच्चे के इलाज के लिए गौहरगंज आना पड़ा है.”
और तो और, अगर कोई इस लापरवाही की शिकायत करे, तो उसे दबाव का सामना करना पड़ता है. स्थानीय निवासी सुनील नायक ने बताया, “मेरे बेटे को उल्टी-दस्त हो रहे हैं. तीन दिन से दवाई के लिए यहाँ आ रहा हूँ, पर हमेशा ताला ही लटका रहता है. मैंने पहले भी आरोग्य केंद्र न खुलने की शिकायत CM हेल्पलाइन में की थी. लेकिन न तो आरोग्य केंद्र समय पर खुला, और न ही कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर ने इसे गंभीरता से लिया. बल्कि उल्टा, BMO कार्यालय के अधिकारियों द्वारा मुझ पर CM हेल्पलाइन की शिकायत वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है.”
यह तो हद हो गई! अगर कोई अपनी परेशानी बताए और उस पर दबाव डाला जाए, तो फिर लोग शिकायत करने की हिम्मत ही कैसे करेंगे?
आखिर क्या कह रहे हैं अधिकारी?
जब इस मामले में अधिकारियों से बात की गई, तो रायसेन के जिला चिकित्सा अधिकारी हरिनारायण मांढरे का कहना है, “औबेदुल्लागंज ब्लॉक की जानकारी मुझे आज ही मिली है. आरोग्य केंद्र पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर टाइम पर नहीं पहुँच रहे हैं. इस संबंध में जानकारी लेकर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी.”
अब देखना ये होगा कि अधिकारियों के इस आश्वासन का ज़मीन पर क्या असर होता है. क्या वाकई इन आरोग्य केंद्रों के ताले खुलेंगे और गाँवों में स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ होंगी, या ये समस्या जस की तस बनी रहेगी? ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा और उनकी समस्याओं का समाधान करेगा.