गुरुर/बालोद।
छत्तीसगढ़ की परंपराओं और लोक संस्कृति को संजोए रखने के उद्देश्य से बालोद जिले के शासकीय प्राथमिक शाला बरहीपारा में हरेली तिहार बड़े ही उत्साह और पारंपरिक अंदाज़ में मनाया गया। इस मौके पर बच्चों और ग्रामीणों के लिए अलग-अलग पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया, जिनमें मटका फोड़, गेड़ी दौड़ और गोली-चम्मच जैसी मनोरंजक प्रतियोगिताएं शामिल थीं।
प्रतियोगिताओं में बच्चों का शानदार प्रदर्शन
हरेली उत्सव के इस आयोजन में नन्हें बच्चों ने अपनी प्रतिभा से सबका दिल जीत लिया। गेड़ी दौड़ में कु. जमुना और द्रोणा ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं गोली-चम्मच रेस में द्रोणा और चैतन्य ने बाजी मारी। मटका फोड़ प्रतियोगिता में चैतन्य कुमार ने जीत हासिल की।
केवल बच्चे ही नहीं, गांव की महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। ग्रामीणों की प्रतियोगिता में गोली-चम्मच रेस में श्रीमती ट्विंकल और श्रीमती वनिता सलाम ने भाग लिया और बेहतरीन प्रदर्शन किया। मटका फोड़ प्रतियोगिता में श्रीमती ट्विंकल कुंजाम ने जीत दर्ज की। वहीं आंगनबाड़ी की ओर से तीन वर्षीय हेयांश कुंजाम ने भी मटका फोड़ में भाग लेकर सबका ध्यान खींचा।
बच्चों को मिला सम्मान और प्रोत्साहन
कार्यक्रम में शिक्षिका पुष्पलता साहू ने अपने निजी खर्च से विजेता बच्चों को टिफिन, पानी की बॉटल और पेन जैसे उपहार देकर सम्मानित किया। उनका कहना था कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, व्यायाम, सामान्य ज्ञान और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक जानकारी से बच्चों का समग्र विकास होता है। साथ ही उन्होंने बच्चों को आपदा प्रबंधन की भी जानकारी दी।
पंचायत प्रतिनिधियों ने की बच्चों की हौसला अफज़ाई
इस आयोजन में ग्राम पंचायत बरही की सरपंच श्रीमती ममता सिन्हा ने भी शिरकत की और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए 201 रुपये की नकद राशि भेंट की।
शाला प्रबंधन समिति की अध्यक्ष एवं प्रभारी प्रधानाध्यापिका जोसेफ मैडम ने भी खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को प्रेरित किया।
आयोजन में रहा पूरे गांव का सहयोग
कार्यक्रम की सफलता में गांव के कई लोगों का अहम योगदान रहा, जिनमें पंच रोहित कुंजाम, उपाध्यक्ष गोविन्द सलाम, मितानिन श्रीमती हेमिन ठाकुर, खुलेश्वरी कुंजाम, सरिता कुंजाम, गजेन्द्र कुंजाम, जगेश कुंजाम, रामकुमार कुंजाम, गंगा सलाम, करूणा सलाम, पूर्णिमा सलाम, चमेली सलाम, चन्द्रकला और तोसन सिन्हा जैसे लोग प्रमुख रहे।
छत्तीसगढ़ की संस्कृति से जोड़ने वाली पहल
यह आयोजन छत्तीसगढ़ की पारंपरिक विरासत और लोक उत्सवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का शानदार माध्यम बना। ऐसे कार्यक्रम न केवल बच्चों के लिए मनोरंजन का जरिया होते हैं, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति, रीति-रिवाज और लोक परंपराओं से गहराई से जुड़ने का मौका भी देते हैं।